Maine Dekha Yashoda Tera Lal Dekha Dekha

मोहन की मोहिनी
मैंने देखा यशोदा तेरा लाल, देखा देखा
कस्तूरी का तिलक बिराजे, उर पचरंगी माल
मोर मुकुट तो सिर पर सोहे, घुँघर वाले बाल
पीताम्बर को कटि में धारे, काँधे कारी शाल
कानों में तो कुण्डल सोहे, और लालिमा गाल
चरणों में नूपुर छमकाये, चले लटकनी चाल
यमुना-तट पे रास रचाये, नाचे दे दे ताल 

Lal Bhaye Nand Lal

होली
लाल भये नँदलाल, साँवरो रंग गयो है
लाल मुकुट, कटि लाल हैं, लाल गले वनमाल
अलकें लाल सुलाल होठ के, दर्शन करें निहाल
ढंग यह आज नयो है
गोप गोपियाँ सभी लाल हैं, और बज रही ताल
ढोल मृदंग झाँझ सब बाजे, नभ में लाल गुलाल
अनोखो फाग छयो है
गगन लाल अरु घटा लाल है, और दिशाये लाल
बरस रह्यो रँग राधा के संग, सब मिल करें धमाल
अधिक आनन्द भयो है

Lal Gulal Gupal Hamari

होली
लाल गुलाल गुपाल हमारी, आँखिन में जिन डारोजू
वदन चंद्रमा नैन चकोरी, इन अन्तर जिन पारोजू
गाओ राग बसंत परस्पर, अटपट खेल निवारोजू
कुंकुम रंग सों भरि पिचकारी, तकि नैनन जिन मारोजू
बाँकी चितवन नेह हृदय भरि, प्रेम की दृष्टि निहारोजू
नागरि-नागर भवसागर ते, ‘कृष्णदास’ को तारोजू 

Chalat Lal Penjani Ke Chai

बालकृष्ण लीला
चलत लाल पैंजनि के चाइ
पुनि-पुनि होत नयौ-नयौ आनँद, पुनि पुनि निरखत पाँइ
छोटौ बदन छोटि यै झिंगुली, कटि किंकिनी बनाइ
राजत जंत्र हार केहरि नख, पहुँची रतन जराइ
भाल तिलक अरु स्याम डिठौना, जननी लेत बलाइ
तनक लाल नवनीत लिए कर, ‘सूरदास’ बलि जाइ

Jasumati Palna Lal Jhulave

यशोदा का स्नेह
जसुमति पलना लाल झुलावे, निरखि निरखि के मोद बढ़ावे
चीते दृष्टि मन अति सचु पावे, भाल लपोल दिठोना लावे
बार बार उर पास लगावे, नन्द उमंग भरे मन भावे
नेति नेति निगम जेहि गावे, सो जसुमति पयपान करावे
बड़भागी ब्रज ‘सूर’ कहावे, मैया अति हर्षित सुख पावे

Jagahu Lal Gwal Sab Terat

प्रभाती
जागहु लाल ग्वाल सब टेरत
कबहुँ पीत-पट डारि बदन पर, कबहुँ उघारि जननि तन हेरत
सोवत में जागत मनमोहन, बात सुनत सब की अवसेरत
बारम्बार जगावति माता, लोचन खोलि पलक पुनि गेरत
पुनि कहि उठी जसोदा मैया, उठहु कान्ह रवि किरनि उजेरत
‘सूर’ स्याम हँसि चितै मातु-मुख, पट कर लै, पुनि-पुनि मुख फेरत

Lal Teri Fir Fir Jat Sagai

माखन चोरी
लाल तेरी फिर फिर जात सगाई
चोरी की लत त्याग दे मोहन, लड़ लड़ जाय लुगाई
दूध दही घर में बहुतेरो, माखन और मलाई
बार बार समुझाय जसोदा, माने न कुँवर कन्हाई
नंदराय नन्दरानी परस्पर, मन में अति सुख पाई
सूर श्याम के रूप, शील गुण, कोउ से कहा न जाई

Jagahu Brajraj Lal Mor Mukut Ware

प्रभाती
जागहु ब्रजराज लाल मोर मुकुट वारे
पक्षी गण करहि शोर, अरुण वरुण भानु भोर
नवल कमल फूल, रहे भौंरा गुंजारे
भक्तन के सुने बैन, जागे करुणा अयन
पूजि के मन कामधेनु, पृथ्वी पगु धारे
करके फिर स्नान ध्यान, पूजन पूरण विधान
बिप्रन को दियो दान, नंद के दुलारे
करके भोजन गुपाल गैयन सँग भये ग्वाल
बंशीवट तीर गये, भानुजा किनारे
मुरलीधर लकुटि हाथ, विहरत गोपिन के साथ
नटवर को वेष कियो, यशुमति के प्यारे
आई में शरण नाथ, बिनवति धरि चरण माथ
‘रूपकुँवरि’ दरस हेतु द्वार पे तिहारे

Dekha Dekha Yashoda Tera Lal

श्रीकृष्ण माधुरी
देखा देखा यशोदा तेरा लाल मैंने देखा
कस्तूरी का तिलक बिराजे, उर पचरंगी माल
मोर पखा सिर ऊपर सोहे, घूँघर वारे बाल
पीताम्बर को कटि में धारे, काँधे कारी शाल
कानों में तो कुण्डल सोहे और लालिमा गाल
चरणों में नुपूर छमकाये, चले लटकनी चाल
यमुना तट पे रास रचाये, नाचे दे-दे ताल
मन्द-मन्द मुस्कान अधर पर गोपियन करे निहाल
अंग-अंग की छबि निराली, सुन्दरता को जाल

Nand Ko Lal Chale Go Charan

गोचारण
नंद को लाल चले गोचारन, शोभा कहत न आवे
अति फूली डोलत नंदरानी, मोतिन चौक पुरावे
विविध मूल्य के लै आभूषण, अपने सुत पहिरावे
आनँद में, भर गावत मंगल गीत सबहिं मन भावे
घर घर ते सब छाक लेत है, संग सखा सुखदाई
गौएँ हाँक आगे कर लीनी, पाछे मुरली बजाई
कुण्डल लाल कपोलन सुन्दर, वनमाला गल छाई
‘परमानन्द’ प्रभु मदनमोहन की सोभा बरनी न जाई