Shyam Liyo Giriraj Uthai

गिरिराज धरण
स्याम लियो गिरिराज उठाई
धीर धरो हरि कहत सबनि सौं, गिरि गोवर्धन करत सहाई
नंद गोप ग्वालिनि के आगे, देव कह्यो यह प्रगट सुनाई
काहै कौ व्याकुल भै डोलत, रच्छा करत देवता आई
सत्य वचन गिरिदेव कहत हैं, कान्ह लेहिं मोहिं कर उचकाई
‘सूरदास’ नारी नर ब्रज के, कहत धन्य तुम कुँवर कन्हाई

Mai Ri Main To Liyo Govind Mol

अनमोल गोविंद
माई री मैं तो लियो री गोविन्दो मोल
कोई कहै छाने, कोई कहै चोरी, लियो री बजंताँ ढोल
कोई कहै कारो, कोई कहै गोरो, लियो री अखियाँ खोल
कोई कहै महँगो कोई कहै सस्तो, लियो री अमोलक मोल
तन का गहणाँ सब ही दीना, दियो री बाजूबँद खोल
‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, पुरब जनम को कोल