Aaj Grah Nand Mahar Ke Badhai

जन्मोत्सव
आज गृह नंद महर के बधाई
प्रात समय मोहन मुख निरखत, कोटि चंद छवि छाई
मिलि ब्रज नागरी मंगल गावति, नंद भवन में आई
देति असीस, जियो जसुदा-सुत, कोटिन बरस कन्हाई
अति आनन्द बढ्यौ गोकुल में, उपमा कही न जाई
‘सूरदास’ छवि नंद की घरनी, देखत नैन सिराई

Krishna Ghar Nand Ke Aaye Badhai Hai Badhai Hai

श्रीकृष्ण प्राकट्य
कृष्ण घर नंद के आये, बधाई है बधाई है
करो सब प्रेम से दर्शन, बधाई है बधाई है
भाद्र की अष्टमी पावन में प्रगटे श्याम मनमोहन
सुखों की राशि है पाई, बधाई है बधाई है
मुदित सब बाल, नर-नारी, चले ले भेंट हाथों में
देख शोभा अधिक हर्षित, बधाई है बधाई है
कृष्ण हैं गोद जननी के, खिल उठे हृदय पंकज दल
करें सब भेंट अति अनुपम, बधाई है बधाई है
सुर मुनि हुए हर्षित जो, बने थे ग्वाल अरु गोपी
परम आनन्द उर छाया, बधाई है बधाई है
बज उठी देव-दुंदुभियाँ, गान करने लगे किन्नर
स्वर्ग से पुष्प बरसाये, बधाई है बधाई है

Yashoda Nand Gopijan Dukhi Hai

विरह वेदना
यशोदा, नन्द, गोपीजन, दुखी है विरह पीड़ा से
परम प्यारा सभी का मैं, कहे यो श्याम उद्धव से
उधोजी ब्रज में जाकर के, मिले तब नन्द बाबा से
कभी गोविंद आयेंगे, यों पूछा नन्द ने उनसे
बही तब आँसुओं की धार, यशोदा नन्द नयनों से
रुँध गया कण्ठ दोनों का, बोल ना पाय उधो से
बँधाया धैर्य उद्धव ने, कहा श्रीकृष्ण आयेंगे
कहा था जो मैं आऊँगा, कथन को वे निभायेंगे
कहा है श्यामसुन्दर ने ‘विलग मैं हूँ नहीं तुमसे’
रखो मन पास में मेरे, सुलभ हूँ प्रेम भक्ति से 

Gopiyan Aai Nand Ke Dware

होली
गोपियाँ आईं नन्द के द्वारे
खेलत फाग बसंत पंचमी, पहुँचे नंद-दुलारे
कोऊ अगर कुमकुमा केसर, काहू के मुख पर डारे
कोऊ अबीर गुलाल उड़ावे, आनँद तन न सँभारे
मोहन को गोपी निरखत सब, नीके बदन निहारे
चितवनि में सबही बस कीनी, मनमोहन चित चोरे
ताल मृदंग मुरली दफ बाजे, झाँझर की झन्कारे
‘सूरदास’ प्रभु रीझ मगन भये, गोप वधू तन वारे

Chalo Ri Mile Natwar Nand Kishor

श्री राधा कृष्ण
चलोरी, मिले नटवर नंदकिशोर
श्रीराधा के सँग विहरत है सघन कुंज चितचोर
तैसिय छटा घुमड़ि चहुँ दिसि तें, गरजत है घनघोर
बिजुरी चमक रही अंबर में, पवन चलत अति जोर
पीत-वसन में श्याम, राधिका नील-वसन तन गोर
सदा विहार करो ‘परमानँद’, बसो युगल मन मोर

Lal Bhaye Nand Lal

होली
लाल भये नँदलाल, साँवरो रंग गयो है
लाल मुकुट, कटि लाल हैं, लाल गले वनमाल
अलकें लाल सुलाल होठ के, दर्शन करें निहाल
ढंग यह आज नयो है
गोप गोपियाँ सभी लाल हैं, और बज रही ताल
ढोल मृदंग झाँझ सब बाजे, नभ में लाल गुलाल
अनोखो फाग छयो है
गगन लाल अरु घटा लाल है, और दिशाये लाल
बरस रह्यो रँग राधा के संग, सब मिल करें धमाल
अधिक आनन्द भयो है

Gwalin Tab Dekhe Nand Nandan

गोपियों का प्रेम
ग्वालिन तब देखे नँद-नंदन
मोर मुकुट पीताम्बर काचे, खौरि किये तनु चन्दन
तब यह कह्यो कहाँ अब जैहौं, आगे कुँवर कन्हाई
यह सुनि मन आनन्द बढ़ायो, मुख कहैं बात डराई
कोउ कोउ कहति चलौ री जाई, कोउ कहै फिरि घर जाई
कोउ कहति कहा करिहै हरि, इनकौ कहा पराई
कोउ कोउ कहति काल ही हमको, लूटि लई नन्दलाला
‘सूर’ श्याम के ऐसे गुण हैं, घरहिं फिरो ब्रजबाला

Chalo Ri Sakhi Nand Bhawan Ko Jayen

प्रभाती
चलोरी सखि, नन्द भवन को जायें
मिले श्याम सुन्दर का दर्शन, जीवन की निधि पायें
प्रातः काल भयो सखि माँ लाला को रही जगाये
उबटन लगा लाल को मैया, अब उसको नहलाये
स्नेह भाव जसुमति के मन में, नवनीत उसे खिलाये
केश सँवार नयन में काजल, माथे तिलक लगाये
रेशम को जामा पहनाकर, स्नेह से उसे सजाये
कटि करधनी पैंजनी रुनझुन, लाला के मन भाये
किलकारी की मधुर ध्वनि सुन, माँ प्रसन्न हो जाये
भाग्यवान सखि गोकुलवासी, बालकृष्ण को पाये 

Jamuna Tat Dekhe Nand Nandan

गोपी का प्रेम
जमुना तट देखे नंद-नन्दन
मोर-मुकुट मकराकृति कुण्डल, पीत वसन, तन चन्दन
लोचन तृप्त भए दरसन ते, उर की तपन बुझानी
प्रेम मगन तब भई ग्वालिनी, सब तन दसा हिरानी
कमल-नैन तट पे रहे ठाड़े, सकुचि मिली ब्रज-नारी
‘सूरदास’ प्रभु अंतरजामी, व्रत पूरन वपु धारी

Jamuna Tat Kridat Nand Nandan

होली
जमुनातट क्रीड़त नँदनंदन, होरी परम सुहाई
युवती-यूथ संग ले राधा, सन्मुख खेलन आई
रत्नजटित पिचकारी भरि के, सखी एक ले धाई
प्राणप्रिया मुख निरख स्याम को, छिरकत मृदु मुसकाई
तब ही गुलाल भरी मुट्ठी में, पिय की ओर चलाई
मानों उमगि प्रीति अतिशय हो, बाहिर देत दिखाई
दौरि अचानक कुँवरि राधिका, गहे स्याम सुखदाई
प्रेम गाँठ में मन अरुझानो, सुरझत नहिं सुरझाई
ब्रजबनिता सब गारी गावैं, मीठे वचन सुनाई
सुर विमान चढ़ि कौतुक भूले, जय जय गोकुलराई