नाम-स्मरण
भजो मन निश-दिन श्यामसुन्दर, सुख-सागर भजो श्री राधावर
सकल जगत् के जीवन-धन प्रभु करत कृपा अपने भक्तों पर
ब्रज सुन्दरियों से सेवित जो, नव नीरद सम वर्ण मनोहर
त्रिभुवन-मोहन वेष विभूषित, शोभा अतुलित कोटि काम हर
तरु कदम्ब तल यमुना तट पे, मुरली में भरते मीठा स्वर
चरण-कमल में नूपुर बाजत, कटि धारे स्वर्णिम पीताम्बर
कालिय मर्दन, गिरिवर धारण, लीला अतिशय सुन्दर सुखकर
रास रचायो वृन्दावन में, धरो हृदय में रूप निरन्तर

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