निवेदन
भवानी, दूर करो दु:ख माँ
तेरो बालक करे पुकार, भवानी! दूर करो दुख माँ
मैं तो हूँ अति कपटी पापी, औगुण को घर माँ
राग-द्वेष में डूब रह्यो नित, शुभ लक्षण नहीं माँ
पूजा-पाठ कछू नहीं जाणूँ, भक्ति न जाणू माँ
साधु-संगत कबहुँ न किन्ही, तीरथ व्रत नहीं माँ
बालपणो तरुणाई बीती, तन-जर्जर अब माँ
मनुज जनम पाकर भी मैं तो, विरथा खोयो माँ

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