Kishori Tere Charanan Ki Raj Pau

श्री श्री राधा महात्म्य
किशोरी तेरे चरणन की रज पाऊँ
बैठि रहौं कुंजन की कोने, श्याम राधिका गाऊँ
जो रज शिव सनकादिक लोचन, सो रज शीश चढाऊँ
राधा स्वामिनि की छवि निरखूँ, नित्य विमल यश गाऊँ
अद्वितीय सौन्दर्य तुम्हारा, मन-मंदिर बिठलाऊँ 

8 thoughts on “Kishori Tere Charanan Ki Raj Pau”

  1. Hi
    My name is Radha and i everyday play this bhajan while doing seva of thakorji.
    Its beautifully discribed about love for shri krishna, but some of the words in last 2 lines i am unable to understand.
    I would be pleased if i get explanation and meanings of the same.

    Thanks
    Jai shree krishna.

    1. जो रज को शिव संकादिक तरसत( मतलब(तेरे ब्रिज की माटी तेरे ब्रिज की रज को देवी देवता भी पाने को तरसते हैं ,मैं उसी ब्रिज रज का तिलक अपने माथेपर लगाऊँ
      राधा स्वामनी की छवि निर्खत (मतलब (श्री राधा रानी का ध्यान करके उनके ही गुन्न गाऊँ बर बर )
      और तेरा नाम कितना सुनदर है ,की तेरे नाम को अपने दिल मे बसा कर तेरा ही चिंतन करूँ

  2. Hare Krishna! I have the heard these lines only:
    किशोरी तेरे चरनन की रज पाऊँ ||

    (१) बैठी रहूँ कुन्जन के कोने ,
    श्याम राधिका गाऊँ ||
    किशोरी तेरे चरनन की रज पाऊँ—

    (२) या रज को ब्रम्हादिक तरसत ,
    सौ रज शीश नवाऊँ ||
    किशोरी तेरे चरनन की रज पाऊँ–

    (३) व्यास स्वामिनी की छवि निरखूँ ,
    विमल-विमल जस गाऊँ ||
    किशोरी तेरे चरनन की रज पाऊँ–

    But I can tell what the last two lines of your paragraph. This is actually written by Hariram Vyaas Ji(Rasik saint of Vrindavan). So, the lines are “Vyaas Swaminie Ke Chhavi nirakhan, Vimal Vimal Jass gaaun” – Hariraam vyass is saying that by meditating or relishing the bliss of radha Rani’s bliss, I will sing her glories.
    The last line of yours written version is “You have such a beautiful form/roop/saundarya and let that be welcomed in my heart or let that form be seated in my heart”.

    I hope this makes sense to you!
    Hare Krishna!

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