Koi Kahiyo Re Prabhu Aawan Ki

विरह व्यथा
कोई कहियौ रे प्रभु आवन की, आवन की मन भावन की
आप न आवै, लिख नहिं भेजै, बान पड़ी ललचावन की
ए दोऊ नैन कह्यो नहिं माने, नदियाँ बहे जैसे सावन की
कहा करूँ कछु नहिं बस मेरो, पाँख नहीं उड़ जावन की
‘मीराँ’ के प्रभु कब रे मिलोगे, चेरी भई तेरे दामन की

2 thoughts on “Koi Kahiyo Re Prabhu Aawan Ki”

Leave a Reply

Your email address will not be published.