Udho Braj Ki Yad Satave

ब्रज की याद
ऊधो! ब्रज की याद सतावै
जसुमति मैया कर कमलन की, माखन रोटी भावै
बालपने के सखा ग्वाल, बाल सब भोरे भारे
सब कुछ छोड़ मोहिं सुख दीन्हौ, कैसे जाय बिसारे
ब्रज-जुवतिन की प्रीति -रीति की, कहा कहौं मैं बात
लोक-वेद की तज मरजादा, मो हित नित ललचात
आराधिका, नित्य आराध्या, राधा को लै नाम
चुप रहि गए, बोल नहिं पाए, परे धरनि हिय थाम

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