Jay Jay Jay Giriraj Kishori

पार्वती वन्दना
जय-जय-जय गिरिराजकिशोरी
जय महेश मुखचंद्र चकोरी
जय गजवदन षडानन माता
जग-जननी दामिनि-द्युति दाता
नहिं तव आदि मध्य अवसाना
अमित प्रभाव वेद नहीं जाना
भव-भय-विभव पराभव कारिणि
विश्व-विमोहिनि स्वबस विहारिणि

Shyam Liyo Giriraj Uthai

गिरिराज धरण
स्याम लियो गिरिराज उठाई
धीर धरो हरि कहत सबनि सौं, गिरि गोवर्धन करत सहाई
नंद गोप ग्वालिनि के आगे, देव कह्यो यह प्रगट सुनाई
काहै कौ व्याकुल भै डोलत, रच्छा करत देवता आई
सत्य वचन गिरिदेव कहत हैं, कान्ह लेहिं मोहिं कर उचकाई
‘सूरदास’ नारी नर ब्रज के, कहत धन्य तुम कुँवर कन्हाई

Anguli Par Dhar Giriraj

गिरिधारी
अँगुली पर धर गिरिराज नाम गिरधारी पायो है
बन्द हुयो सुरपति पूजन, गिरिराज पुजायो है
सवा लाख मण सामग्री को, भोग लगायो है
पड़ी स्वर्ग में खबर, क्रोध शचीपति को आयो है
मूसलधार अपार बहुत ही, जल बरसायो है
पड़ी न ब्रज पर बूँद, इन्द्र मन में घबरायो है
ब्रजवासी सब कहें श्याम, गिरिराज उठायो है

Jay Durge Giriraj Nandini

देवी स्तवन
जय दुर्गे गिरिराज नन्दिनी जय अम्बे उज्ज्वल द्युति दामिनि
जय भगवती महादेव भामिनी, जय स्कन्द गजानन पालिनि
कान्तिमयी दुर्गा महारानी, महामर्दिनी वांछित फल दायिनी
हरि, हर ब्रह्मा वेद बखानी, ध्यान धरत सुर-नर-मुनि ज्ञानी
विकसित कमल नयन कात्यायिनि, शंख, पद्म कर धरे भवानी
सत्चित-सुखमय व्याधि विमोचनि, गदा, चक्र, बाणाकुंश शोभिनि
आदि शक्ति चण्डमुण्ड विनाशिनि मधु,कैटभ, महिषासुर मर्दिनि
रत्न हार कटि किंकिणी सोहिनि नक बेसर बिंदी मन मोहिनि
त्रिपुरसुन्दरी भवभय भंजनि, लोक पावनी जय जगजननी

Pujan Ko Giriraj Goverdhan

अन्नकूट उत्सव
पूजन को गिरिराज गोवर्धन चले नंद के लाल
कर श्रंगार सभी ब्रज नारी और गये सब ग्वाल
नंद यशोदा भी अति उत्सुक ले पूजा का थाल
गये पूजने गोवर्धन गिरि, तिलक लगाये भाल
भाँति भाँति के व्यंजन एवं फल भी विविध रसाल
एक ओर मनमोहन ने तब कर ली देह विशाल
गिरिवर रूप धरे आरोगत, व्यंजन प्रभु तत्काल
गायें गीत गोपियाँ मिलकर और बजे करताल