Kutiya Par Raghav Aaye To Shabari

शबरी का प्रेम
कुटिया पर राघव आये तो, शबरी की साधना पूर्ण हुई
तन मन की सुधि वह भूल गई, प्रभु के चरणों में लिपट गई
आसन देकर वह रघुवर को, छबड़ी में बेरों को लाई
चख चख कर मीठे बेर तभी, राघव को दे मन हर्षाई
यह स्नेह देख कर शबरी का, निज माँ की याद त्वरित आई
होकर प्रसन्न तब तो प्रभु ने, निज धाम में उसको भेज दिया
इस भाँति अनेकों भक्तों का, करुणानिधि ने कल्याण किया 

Main To Ta Din Kajara Dehon

श्री कृष्ण से प्रीति
मैं तो ता दिन कजरा दैहौं
जा दिन नंदनँदन के नैननि, अपने नैन मिलैहौं
सुन री सखी, यही जिय मेरे, भूलि न और चितैहौं
अब हठ ‘सूर’ यहै व्रत मेरौ विष खाकरि मरि जैहौ

Main To Tore Charan Lagi Gopal

शरणागत
मैं तो तोरे चरण लगी गोपाल
जब लागी तब कोउ न जाने, अब जानी संसार
किरपा कीजौ, दरसण दीजो, सुध लीजौ तत्काल
‘मीराँ’ कहे प्रभु गिरिधर नागर, चरण-कमल बलिहार

Jiwan Swayam Ka To Malin

पाखण्ड
जीवन स्वयं का तो मलिन, उत्सुक हमें उपदेश दे
यह तो विरोधाभास है उनमें अहं भरपूर है
अन्त:करण से तो कुटिल, सत्कर्म का पर ज्ञान दे
यह ढोंगियों का आचरण, विश्वास उस पर क्यों करें
जो भक्ति का प्रतिरोध करते, मुक्ति का निर्देश दे
अनभिज्ञ वे तो शास्त्र से, सद्ज्ञान से कोसो परे
साधन भजन करते नहीं, संसार-सुख में ही फँसे
बातें करे वेदान्त की, वे तो उपेक्षा योग्य है
कर्तव्य यह कलिकाल में, सत्संग व स्वाध्याय हो
इस भाँति सद्गुण हो सुलभ, सत्कर्म ही सन्मार्ग है

Maiya Main To Chand Khilona

कान्हा की हठ
मैया, मैं तौ चंद-खिलौना लैहौं
जैहौं, लोटि धरनि पर अबहीं, तेरी गोद न ऐहौं
सुरभी कौ पे पान न करिहौं, बेनी सिर न गुहैहौं
ह्वैहौं पूत नंद बाबा कौ, तेरौ सुत न कहैहौं
आगै आउ, बात सुनि मेरी, बलदेवहि न जनैहौं
हँसि समुझावति, कहति जसोमति, नई दुल्हनिया दैहौं
तेरी सौं, मेरी सुनि मैया, अबहिं बियाहन जैहौं
‘सूरदास’ ह्वै कुटिल बराती, गीत सुमंगल गैहौं

Main To Mohan Rup Lubhani

रूप लुभानी
मैं तो मोहन रूप लुभानी
सुंदर वदन कमल-दल लोचन, चितवन की मुसकानी
जमना के नीर तीरे धेनु चरावै, मुरली मधुर सुहानी
तन मन धन गिरिधर पर वारूँ, ‘मीराँ’ पग लपटानी

The To Aarogo Ji Madan Gopal

दुग्ध अर्पण
थे तो आरोगोजी मदनगोपाल! कटोरो ल्याई दूध को भर्यो
दूधाजी दीनी भोलावण, जद में आई चाल
धोली गाय को दूध गरम कर, ल्याई मिसरी घाल
कईयाँ रूठ गया हो म्हारा नाथ! कटोरो….
कद ताई रूठ्या रोगा थे बोलो जी महाराज
दूध-कटोरो धर्यो सामने, पीवणरी काँई लाज
भूखा मरता तो चिप जासी थारा चिकणा गाल! कटोरो…
श्याम सलोना दूध आरोगो, साँची बात सुनाऊँ
बिना पियाँ यो दूध-कटोरो, पाछो ले नहीं जाऊँ
देस्यूँ साँवरिया चरणा में देही त्याग! कटोरो
करुण भरी विनती सुण प्रभुजी, लियो कटोरो हाथ
गट-गट दूध पिवण ने लाग्या, भक्त जणारा नाथ
थे तो राखो हो भगताँ री जाती लाज! कटोरो…

Ham To Nandgaon Ke Vasi

गोकुल की महिमा
हम तो नंदग्राम के वासी
नाम गोपाल, जाति कुल गोपहिं, गोप-गोपाल उपासी
गिरिवरधारी, गोधनचारी, वृन्दावन-अभिलाषी
राजा नंद जसोदा रानी, जलधि नदी जमुना सी
प्रान हमारे परम मनोहर, कमल नयन सुखरासी
‘सूरदास’ प्रभु कहौ कहाँ लौं, अष्ट महासिधि दासी

Main To Sanware Ke Rang Rachi

प्रगाढ़ प्रीति
मैं तो साँवरे के रँग राची
साजि सिंगार बाँधि पग घुँघरू, लोक-लाज तजि नाची
गई कुमति लई साधु की संगति, स्याम प्रीत जग साँची
गाय गाय हरि के गुण निस दिन, काल-ब्याल सूँ बाँची
स्याम बिना जग खारो लागत, और बात सब काँची
‘मीराँ’ गिरिधर-नटनागर वर, भगति रसीली जाँची

Prabhu Ji Main To Tharo Hi Tharo

समर्पण (राजस्थानी)
प्रभुजी मैं तो थारो ही थारो
भलो बुरो जैसो भी हूँ मैं, पर हूँ तो बस थारो
बिगड्यो भी तो थारो बिगड्यो, थे ही म्हने सुधारो
म्हारी बात जाय तो जाये, नाम बिगड़ सी थारो
चाहे कहे म्हने तो बिगडी, विरद न रहसी थारो
जँचे जिस तरे करो नाथ, थे मारो चाहे तारो