Aaj Vrashbhanu Geh Anand

श्री राधा जन्मोत्सव
आज वृषभानु गेह आनन्द
वदन प्रभा सी लागत मानो, प्रगट्यो पूरन-चंद
बजे बाजने नाचे गाये, कोइ सुनावत टेर
सुनि सब नारि बधावन आई, किये बिना कछु देर
नंदराय अरु जसुमति रानी, न्योता पा चलि आये
सुनतहि सबन भरे आनंद में, हुलसि भेंट को लाये
अपने अपने मन को भाये, करत सकल ब्रज लोग
‘सूरदास’, प्रगटी पृथ्वी पर, भक्तजन के हितजोग

Pragati Anup Rup Vrashbhanu

श्री राधा प्राकट्य
प्रगटी अनूप रूप, वृषभानु की दुलारी
राधा शुचि मधुर-मधुर, कीर्तिदा-कुमारी
चंद्र-वदन रूप सौम्य, दोऊ कर-कमल मधुर
विशद नयन-कमल मधुर, आनँद विस्तारी
अरुन चरन-पद्म सदृश, भौंह मधुर भाव मधुर
अधरनि मुसकान मधुर, सरवस बलिहारी
आए तहँ दरसन हित, शिव, ऋषि व्रतधारी
रासेश्वरि श्री राधा के, कान्हा की प्यारी

Aarti Shri Vrashbhanu Lali Ki

राधारानी आरती
आरती श्रीवृषभानुलली की, सत्-चित-आनंद-कद-कली की
भयभंजनि भव-सागर-तारिणि, पाप-ताप-कलि-कल्मष-हारिणि,
दिव्यधाम गोलोक-विहारिणि, जन पालिनि जग जननि भली की
अखिल विश्व आनन्द विधायिनि, मंगलमयी वैभव सुख-दायिनि,
नंद नँदन पद-प्रेम प्रदायिनि, अमिय-राग-रस रंग-रली की
नित्यानन्दमयी आल्हादिनि लीलाएँ-आनंद-प्रदायिनि,
रसमयी प्रीतिपूर्ण आल्हादिनी, सरस कमलिनि कृष्ण-अली की
नित्य निकुंजेश्वरि श्री राजेश्वरि, परम प्रेमरूपा परमेश्वरि,
गोपिगणाश्रयि गोपिजनेश्वरि, विमल विचित्र भाव-अवली की