Ab Odhawat Hai Chadariya Vah Dekho Re Chalti Biriya

अंतिम अवस्था
अब ओढ़ावत है चादरिया, वह देखो रे चलती बिरिया
तन से प्राण जो निकसन लागे, उलटी नयन पुतरिया
भीतर से जब बाहर लाये, छूटे महल अटरिया
चार जने मिल खाट उठाये, रोवत चले डगरिया
कहे ’कबीर’ सुनो भाई साधो, सँग में तनिक लकड़िया

Ab Tum Kab Simaroge Ram

हरिनाम स्मरण
अब तुम कब सुमरो गे राम, जिवड़ा दो दिन का मेहमान
गरभापन में हाथ जुड़ाया, निकल हुआ बेइमान
बालापन तो खेल गुमाया, तरूनापन में काम
बूढ़ेपन में काँपन लागा, निकल गया अरमान
झूठी काया झूठी माया, आखिर मौत निदान
कहत ‘कबीर’ सुनो भाई साधो, क्यों करता अभिमान

Muraliya Mat Baje Ab Aur

मुरली का जादू
मुरलिया! मत बाजै अब और
हर्यौ सील-कुल-मान करी बदनाम मोय सब ठौर
रह्यो न मोपै जाय सुनूँ जब तेरी मधुरी तान
उमगै हियौ, नैन झरि लागै, भाजन चाहैं प्रान
कुटिल कान्ह धरि तोय अधर पर, राधा राधा टेरे
रहै न मेरौ मन तब बस में, गिनै न साँझ सवेरे

Ab Nithurai Tajo Brajrani

बालकृष्ण बंधन
अब निठुराई तजो ब्रजरानी
ऐसो लाल बाँधवे लायक, द्युति आनन कुम्हलानी
भाग बड़े विधि दयो एक सुत, पूजत शंभु-भवानी
ताको उदर दाम ते बाँध्यो, करुणा कितै गँवानी
नित नवनीत खात हरि हमरो, गोपीन की मनभानी
मात जसोदा जरा न मानी, गोप-वधुन की बानी
बाँध दियो जब बाल-कृष्ण को, फिर मन में पछतानी

Ab Man Krishna Krishna Kahi Lije

श्रीकृष्ण स्मरण
अब मन कृष्ण कृष्ण कहि लीजे
कृष्ण कृष्ण कहि कहिके जग में, साधु समागम कीजे
कृष्ण नाम की माला लेके, कृष्ण नाम चित दीजे
कृष्ण नाम अमृत रस रसना, तृषावंत हो पीजै
कृष्ण नाम है सार जगत् में, कृष्ण हेतु तन छीजे
‘रूपकुँवरि’ धरि ध्यान कृष्ण को, कृष्ण कृष्ण कहि लीजे 

Ab Main Koun Upay Karu

असमंजस
अब मैं कौन उपाय करूँ
जेहि बिधि मनको संसय छूटै, भव-निधि पार करूँ
जनम पाय कछु भलो न कीन्हों, ताते अधिक डरूँ
गुरुमत सुन के ज्ञान न उपजौ, पसुवत उदर भरूँ
कह ‘नानक’ प्रभु बिरद पिछानौ, तब मैं पतित तरूँ 

Ab Sonp Diya Is Jiwan Ka

समर्पण
अब सौंप दिया इस जीवन को, सब भार तुम्हारे हाथों में
है जीत तुम्हारे हाथो में और हार तुम्हारे हाथों में
मेरा निश्चय बस एक यही, एक बार तुम्हें पा जाऊँ मैं
अर्पण कर दूँ दुनिया भर का, सब प्यार तुम्हारे हाथों में
जो जग में रहूँ तो ऐसे रहूँ, ज्यों जल में कमल का फूल रहे
मेरे गुण दोष समर्पित हों, श्रीकृष्ण तुम्हारें हाथों में
यदि मानव का मुझे जन्म मिले, तो तव चरणों का पुजारी बनूँ
इस पूजक की इक-इक रग का, हो तार तुम्हारे हाथों में
जब जब संसार का कैदी बनूँ, निष्काम भाव से कर्म करूँ
फिर अन्त समय में प्राण तजूँ, भगवान तुम्हारे हाथों में
मुझ में तुम में बस भेद यही, मैं नर हूँ तुम नारायण हो
मैं हूँ संसार के हाथों में, संसार तुम्हारे हाथों में

Karo Ab Jaane Ki Taiyari

चेतावनी
करो अब जाने की तैयारी
साधु संत सम्राट भी जायें, जाते सब संसारी
देह तुम्हारी लगी काँपने, अंत काल की बारी
ईर्ष्या द्वेष अहं नहीं छूटे, उम्र बिता दी सारी
मोह जाल में फँसा रहे मन, वह है व्यक्ति अनारी
काम न आये कोई अन्ततः, फिर भी दुनियादारी
खाते, चलते सभी समय बस, जपलो कृष्ण मुरारी

Ab Lo Nasani

भजन के पद
शुभ संकल्प
अब लौं नसानी, अब न नसैंहौं
राम-कृपा भव-निसा सिरानी, जागे फिरि न डसैंहौं
पायउँ नाम चारु चिंतामनि, उर करतें न खसैंहौं
श्याम रूप सुचि रुचिर कसौटी, चित कंचनहिं कसैंहौं
परबस जानी हँस्यो इन इंद्रिन, निज बस ह्वै न हँसैंहौं
मन मधुकर पन करके ‘तुलसी’, रघुपति पद-कमल बसैंहौं

Tu So Raha Ab Tak Musafir

चेतावनी
तूँ सो रहा अब तक मुसाफिर, जागता है क्यों नहीं
था व्यस्त कारोबार में,अब भोग में खोया कहीं
मोहवश जैसे पतिंगा, दीपक की लौ में जल मरे
मतिमान तूँ घर बार में फिर, प्रीति इतनी क्यों करे
लालच में पड़ता कीर ज्यों, पिंजरे में उसका हाल ज्यों
फिर भी उलझता जा रहा, संसार माया जाल क्यों
भगवान का आश्रय ग्रहण जग से नाता तोड़ दें
प्राणियों के वे सुहद, भव-निधि से तुझको तार दे