Jhulat Ram Palne Sohe

झूला
झूलत राम पालने सोहैं, भूरि-भाग जननीजन जोहैं
तन मृदु मंजुल मे चकताई, झलकति बाल विभूषन झाँई
अधर – पानि – पद लोहित लोने, सर – सिंगार – भव सारस सोने
किलकत निरखि बिलोल खेलौना, मनहुँ विनोद लरत छबि छौना
रंजित – अंजन कंज – विलोचन, भ्रातज भाल तिलक गोरोचन
लस मसिबिंदु बदन – बिधुनीको, चितवत चित चकोर ‘तुलसी’ को

Jasoda Hari Palne Jhulawe

पालना
जसोदा हरि पालना झुलावै
मेरे लाल की आउ निंदरिया, काहे न आन सुवावै
तूँ काहैं नहि बेगिहि आवै, तोको कान्ह बुलावै
कबहुँ पलक हरि मूँदि लेत हैं, कबहुँ अधर फरकावै
सौवत जानि मौन ह्वैके रहि, करि करि सैन बतावै
जो सुख ‘सूर’ देव मुनि दुरलभ, सो नँद भामिनि पावें

Ladili Surang Palne Jhule

झूला
लाड़िली सुरंग पालने झूले
कीरति रानी सुलावै, गावै, हर्षित अति मन फूले
भाँति भाँति के लिये खिलौना, प्रमुदित गोद खिलावे
देखि देखि मुसकाति सलोनी द्वैदंतुलि दरसावे
शोभा की सागर श्री राधा, उमा रमा रति वारी
तिहि छन की शोभा कछु-न्यारी, विधि निज हाथ सँवारी 
यशोदा का सुखलाल को पलना मात पौढ़ाये
स्नान करा झँगुला रेशम का, पहना उसे झुलाये
आओरी निंदिया तुरत ही आओ, लोरी उसे सुनाये
कब ही नैन बंद कर लेवे, कब ही ओंठ फड़काये
सोचा अब तो लाल सो गयो, मैया चुप हो जाये
जगा कन्हैया इतने में तो, फिर से गीत सुनाये
जो न सुलभ सुख सुर मुनियों को, नन्दगेहनी पाये