Nayan Main Daro Mati Gulal

होली
नयन में डारो मती गुलाल, तिहारे पाँय परत नन्दलाल
अंतर होत पिया दरसन में, बिन दरसन बेहाल
कनक बेलि वृषभानु-नन्दिनी, प्रीतम स्याम तमाल
ऋतु बसंत वृंदावन फूल्यो, नाचत गोपी ग्वाल
वेणु बजावे मधुरे गावे, नाना विधि दे ताल
‘रामदास’ प्रभु गिरिधर नागर, पिक रंग सोहे गाल 

Pakari Lehun Sab Jasumati Ko

होली
पकरि लेहु सब जसुमति को, लाल चटक यापे रंग डारौ
करि रहयो छेड़खानी कबसे, यापे कोऊ न बरजन वारो
अरी सखी! हौं तो अलबेली, खेलत फाग में परी अकेली
काहु की माने नाहिं तनिक हू, करि रह्यो मोसों ही अठखेली
होरी के मिस करै धमाल अरी सखि जातै लेहु छुड़ाय
पकरि लेहु झटपट नन्दकुमार, कहूँ जे भाग निकरि ना पाय 

Vanshi Vat Jamuna Ke Tat Par

होली
वंशी-वट जमुना के तट पर, श्याम राधिका खेले होरी
ग्वाल-बाल संग में गिरिधारी, सज आई बृजभानु दुलारी
संग लिये ब्रजवाल, खेल रहे होरी
पिचकारी भर रंग चलावैं, भर भर मूठ गुलाल उड़ावैं
धरा गगन भये लाल, खेल रहे होरी
केसर कुंकुम और अरगजा, मलै परस्पर श्याम भानुजा
बाढ्यो प्रेम विशाल, खेल रहे होरी
लाल प्रिया दोउ खेले होरी, सखियाँ फगुवा ले भर झोरी
हो गये सभी निहाल, खेल रहे होरी 

Ab To Sanjh Bit Rahi Shyam

होली
अब तो साँझ बीत रही श्याम, छोड़ो बहियाँ मोरी
तुम ठहरे ब्रजराज कुँवरजी, हम ग्वालिन अति भोरी
आनंद मगन कहूँ मैं मोहन,अब तो जाऊँ पौरी
लाज बचेगी मोरी
सास, ननद के चुपके छाने, तुम संग खेली होरी
अँगुली पकरत पहुँचो पकरयो और करी बरजोरी
हम हैं ब्रज की छोरी
मीठी-मीठी तान बजाकर, लेन सखिन चित चोरी
‘सूरदास’ प्रभु कुँवर कन्हाई, मुख लपटावत रोरी
बोलत हो हो होरी

Biraj Main Holi Khelat Nandlal

होली
बिरज में होरी खेलत नँदलाल
ढोलक झाँझ मँजीरा बाजत, सब सखियाँ मिल होरी गावत,
नाचत दे दे ताल
भर भरके पिचकारी मारत, भीजत है ब्रज के नर नारी,
मुग्ध भई ब्रज-बाल
धरती लाल, लाल भयो अम्बर, लाल राधिका, लालहि नटवर,
उड़त अबीर गुलाल
होरी खेलत है कुँवर कन्हाई, जमुना तट पर धूम मचाई,
क्रीड़ा करत गुपाल

Gopiyan Aai Nand Ke Dware

होली
गोपियाँ आईं नन्द के द्वारे
खेलत फाग बसंत पंचमी, पहुँचे नंद-दुलारे
कोऊ अगर कुमकुमा केसर, काहू के मुख पर डारे
कोऊ अबीर गुलाल उड़ावे, आनँद तन न सँभारे
मोहन को गोपी निरखत सब, नीके बदन निहारे
चितवनि में सबही बस कीनी, मनमोहन चित चोरे
ताल मृदंग मुरली दफ बाजे, झाँझर की झन्कारे
‘सूरदास’ प्रभु रीझ मगन भये, गोप वधू तन वारे

Biraj Main Holi Ki Hai Dhum

होली
बिरज में होली की है धूम
लेकर हाथ कनक पिचकारी, यहाँ खड़ें हैं कृष्ण मुरारी,
उतते आई गोपकुमारी, पकड़ लियो झट से बनवारी
मुख पर मल दी तभी गुलाल, बिरज में होली है
अब आई वृजभानु-दुलारी, और साथ में सखियाँ न्यारी,
घेर लियो फिर नँद-नंदन को, पहना दी रेशम की सारी
रंग दियो श्याम को गाल, बिरज में होली है
माथे पे बिंदिया, नैन में कजरा, खूब सजायो नंद को लाला,
गोपीजन ने खूब छकायो, बड़ी चतुर ये ब्रज की बाला
उड़त अबीर गुलाल, बिरज में होली है

Braj Me Hari Hori Machai

होली
ब्रज में होरी मचाई
इत ते आई कुँवरि राधिका, उतते कुँवर कन्हाई
गोपिन लाज त्यागि रंग खेलत, शोभा बरनि न जाई, नंद-घर बजत बधाई
बाजत ताल मृदंग बाँसुरी, बीना डफ शहनाई
उड़त अबीर, गुलाल, कुंकुमा, रह्यो चहुँ दिसि छाई, मानो मघवा झड़ी लगाई
भरि-भरि रंग कनक पिचकारी, सन्मुख सबै चलाई
छिरकत रंग अंग सब भीजै, झुक झुक चाचर गाई, अति उमंग उर छाई
राधा सेन दई सखियन को, झुंड झुंड घिर आई
लपट लपट गई श्याम सुंदर सौं, हाथ पकर ले जाई, लालजी को नाच नचाई
उत्सुक सबहीं खेलन आई, मरजादा बिसराई
‘सूरदास’ प्रभु छैल छबीले, गोपिन अधिक रिझाई, प्रीति न रही समाई

Braj Main Kaisi Hori Machai

होली
ब्रज में कैसी होरी मचाई, करत परस्पर रोरी
नंदकुँवर बरसाने आये, खेलन के मिस होरी
बाँह पकड़ एक ग्वालिन की वे, बहुत ही करै चिरौरी
अब तो बहियाँ छोड़ो प्यारे, देखत हमें किसोरी
अधिक अधीर राधिका आई, जानत श्याम ठगोरी
होली खेलत राधा मोहन, गलियन रंग बह्योरी
लाल भयो कटिपट मोहन को, लाल राधिका गोरी

Shyam Moso Khelo Na Hori

होली
स्याम मोसों खेलो न होरी, पाँव पडूं कर जोरी
सगरी चुनरिया रँग न भिजाओ, इतनी सुन लो मोरी
झपट लई मोरे हाथ ते गागर, करो मती बरजोरी
दिल धड़कत मेरी साँस बढ़त है, देह कँपत रँग ढोरी
अबीर गुलाल लिपट दियो मुख पे, सारी रँग में बोरी
सास ननँद सब गारी दैहैं, आई उनकी चोरी
फाग खेल के मोहन प्यारे, क्या कीनी गति मोरी
‘सूरदास’ गोपी के मन में, आनन्द बहुत बह्यो री