Yashoda Kaiso Lala Jayo

यशोदा के लाल
यशोदा कैसो लाला जायो
कोई कहे कुसुम अलसी सम, अन्जन अपर बतायो
कोई दुर्वा-वन सम शोभा, उत्पल द्युति कहि गायो
कोई कहे जनम नहिं याको, छिपि मधुबन तें आयो
कोई कहे ब्रह्मा को बाबा, वेदहु भेद न पायो
कैसो कहे कहत सकुचावत, नहिं हम दरशन पायो
गोविन्द गोकुल कुँवर गोपपति, गोपीश्वर कहलायो
कहा कहूँ कछु कहत न आवै, चरण कमल सिर नायो

Jasumati Palna Lal Jhulave

यशोदा का स्नेह
जसुमति पलना लाल झुलावे, निरखि निरखि के मोद बढ़ावे
चीते दृष्टि मन अति सचु पावे, भाल लपोल दिठोना लावे
बार बार उर पास लगावे, नन्द उमंग भरे मन भावे
नेति नेति निगम जेहि गावे, सो जसुमति पयपान करावे
बड़भागी ब्रज ‘सूर’ कहावे, मैया अति हर्षित सुख पावे

Abhilasha Ashumati Man Jagi

यशोदा की लालसा
अभिलाषा यशुमति मन जागी, मुसकाया जैसे ही लाला
कब तुतला करके मैया कह, ये मुझे पुकारेगा लाला
यह आयेगा दिन कब ऐसा, जब आँचल पकड़ेगा लाला
हठ कर गोदी में आने को, मचलेगा मेरा यह लाला
कब मंगलमय दिन आयेगा, हँस करके बोलेगा लाला

Jasoda Hari Palne Jhulawe

पालना
जसोदा हरि पालना झुलावै
मेरे लाल की आउ निंदरिया, काहे न आन सुवावै
तूँ काहैं नहि बेगिहि आवै, तोको कान्ह बुलावै
कबहुँ पलक हरि मूँदि लेत हैं, कबहुँ अधर फरकावै
सौवत जानि मौन ह्वैके रहि, करि करि सैन बतावै
जो सुख ‘सूर’ देव मुनि दुरलभ, सो नँद भामिनि पावें

Dekhe Ham Hari Nangam Nanga

श्याम स्वरुप
देखे हम हरि नंगम्नंगा
आभूषण नहिं अंग बिराजत, बसन नहीं, छबि उठत तरंगा
अंग अंग प्रति रूप माधुरी, निरखत लज्जित कोटि अनंगा
किलकत दसन दधि मुख लेपन, ‘सूर’ हँसत ब्रज जुवतिन संगा

Nand Dwar Ek Jogi Aayo Singi Nad Bajayo

शिव द्वारा दर्शन
नंद द्वार इक जोगी आयो सिंगी नाद बजायो
सीस जता ससि बदन सोहायो, अरुन नयन छबि छायो
रोवत खीजत कृष्ण साँवरो, रहत नहीं हुलरायो
लियो उठाय गोद नँदरानी, द्वारे जाय दिखायो
अलख अलख करि लियो गोद में, चरन चूमि उर लायो
श्रवण लाग कछु मंत्र सुनायो, हँसि बालक किलकायो
चिर-जीवौ सुत महरि तिहारो, हौं योगी सुख पायो
‘सूरदास’ रमि चल्यो रावरो, संकर नाम बतायो

Nandahi Kahat Jasoda Rani

मुख में सृष्टि
नंदहि कहत जसोदा रानी
माटी कैं मिस मुख दिखरायौ, तिहूँ लोक रजधानी
स्वर्ग, पताल, धरनि, बन, पर्वत, बदन माँझ रहे आनी
नदी-सुमेर, देखि भौंचक भई, याकी अकथ कहानी
चितै रहे तब नन्द जुवति-मुख, मन-मन करत बिनानी
सूरदास’ तब कहति जसोदा, गर्ग कही यह बानी

Palna Syam Jhulavati Janani

पलना
पलना स्याम झुलावति जननी
अति अनुराग ह्रदय में, गावति, प्रफुलित मगन होति नँद घरनी
उमँगि- उमँगि प्रभु भुजा पसारत, हरषि जसोमति अंकम भरनी
‘सूरदास’ प्रभु मुदित जसोदा, पूरन भई पुरातन करनी

Bal Krishna Kahe Maiya Maiya

माँ का स्नेह
बालकृष्ण कहे मैया मैया
नन्द महर सौं बाबा-बाबा, अरु हलधर सौं भैया
ऊँचे चढ़ि-चढ़ि कहति जसोदा, लै लै नाम कन्हैया
दूर खेलन जनि जाहु ललारे, मारेगी कोउ गैया
गोपी ग्वाल करत कौतूहल, घर-घर बजत बधैया
‘सूरदास’ प्रभु तुम्हरे दरस को, चरणनि की बलि जैया

Main Ik Nai Bat Sun Aai

श्री कृष्ण प्राकट्य
मैं इक नई बात सुन आई
महरि जसोदा ढोटा जायौ, घर घर होति बधाई
द्वारैं भीर गोप-गोपिन की, महिमा बरनि न जाई
अति आनन्द होत गोकुल में, रतन भूमि सब छाई
नाचत वृद्ध, तरुन अरु बालक, गोरस कीच मचाई
‘सूरदास’ स्वामी सुख-सागर, सुन्दर स्याम कन्हाई