प्रभु प्राकट्य
पृथ्वी पर अत्याचारों का, है लग जाता अम्बार जभी
मंगलमय जो है परब्रह्म, विष्णु लेते अवतार तभी
पुरुषोत्तम श्रीमन् नारायण, हैं परमानन्द स्वरूप आप
स्थापित करते पुनः धर्म, साधु सन्तों का हरें ताप
कछुवा, वराह, हयग्रीव, मत्स्य का रूप धरे वे ही आते
संहार करें वे असुरों का, पृथ्वी का भार वही हरते
श्री राम, कृष्ण, वामन, नरसिंह, जिनका करते हैं भक्त गान
लीलाएँ उनकी पढ़ें सुनें, हिरदै में उनका धरे ध्यान

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *