Jiv Bas Ram Nam Japna

हरिनाम स्मरण
जीव बस राम नाम जपना, जरा भी मत करना फिकरी
भाग लिखी सो हुई रहेगी, भली बुरी सगरी
ताप करके हिरणाकुश राजा, वर पायो जबरी
लौह लकड़ से मार्यो नाहीं, मर्यौ मौत नख री
तीन लोक ककी माता सीता, रावण जाय हरी
जब लक्षमण ने करी चढ़ाई, लंका गई बिखरी
आठों पहर राम को रटना, ना करना जिकरी
कहत ‘ कबीर’ सुनो भाई साधो, रहना बिन फिकरी

Din Yu Hi Bite Jate Hain Sumiran Kar Le Tu Ram Nam

नाम स्मरण
दिन यूँ ही बीते जाते हैं, सुमिरन करले तूँ राम नाम
लख चौरासी योनी भटका, तब मानुष के तन को पाया
जिन स्वारथ में जीवन खोया, वे अंत समय पछताते हैं
अपना जिसको तूँने समझा, वह झूठे जग की है माया
क्यों हरि का नाम बीसार दिया, सब जीते जी के नाते हैं
विषयों की इच्छा मिटी नहीं, ये नाशवान सुन्दर काया
गिनती के साँस मिले तुझको, जाने पे फिर नहीं आते हैं
सच्चे मन से सुमिरन कर ले, अब तक मूरख मन भरमाया
साधु-संगत करले ‘कबीर’, तो निश्चित ही तर जाते हैं

Ram Nam Ke Bina Jagat Main

राम आसरा
राम नाम के बिना जगत में, कोई नहीं भाई
महल बनाओ बाग लगाओ, वेष हो जैसे छैला
इस पिजड़े से प्राण निकल गये, रह गया चाम अकेला
तीन मस तक तिरिया रोवे, छठे मास तक भाई
जनम जनम तो माता रोवे, कर गयो आस पराई
पाँच पचास बराती आये, ले चल ले चल होई
कहत ‘कबीर’ सुनो भाई साधो, यह गति तेरी होई

Jagat Main Radha Nam Amol

श्री राधा स्मरण
जगत में राधा नाम अमोल
व्यर्थ न करो बकवाद बावरे, राधा राधा बोल
राधा नाम सरस अति सुन्दर, हीरा सम अनमोल
जातें सुखद वस्तु नहिं जग में, भक्तनि लीयो तोल
राधा कच कारे घुँघराले, बाँके लोचन लोल
हिय मनहर कटि छीन उदर बर, रूप अनूप सुडोल

Bhajan Ko Namahi Nam Bhayo

भजन महिमा
भजन को नामहि नाम भयो
जासों द्रवहि न प्राननाथ, वह कैसे भजन भयो
कर माला, मुख नाम, पै न मन में कोई भाव रह्यो
केवल भयो प्रदरसन, लोगन हूँ ने भगत कह्यो
पायो मानुष जन्म, वृथा ऐसे ही समय गयो
मन में साँची लगन होय सो, साँचो भजन कह्यो
बिरह व्यथा में बीतहिं वासर, रैन न चैन लह्यो
असन वसन हूँ भारी लागें, तो कछु भजन भयो

Re Man Krishna Nam Jap Le

श्री कृष्ण स्मरण
रे मन कृष्ण नाम जप ले
भटक रहा क्यों इधर उधर तू, कान्ह शरण गह ले
जनम मरण का चक्कर इससे, क्यों न मुक्त हो जाये
यह संसार स्वप्न के जैसा, फिर भी क्यों भरमाये
जिनको तू अपना है कहता, कोई भी नहीं तेरा
मनमोहन को हृदय बिठाले, चला चली जग फेरा

Nam Liya Prabhu Ka Jisane

सदुपदेश
नाम लिया प्रभु का जिसने चाहे साधन और किया न किया
जड़ चेतन जग में भी जितने, घट में सम इनको जान सदा
परमारथ का नित कार्य किया, चाहे दान किसी को दिया न दिया
जिसके घर में हरि चर्चा हो, दिन रात छोड़ दुनियादारी
सत्संग कथामृत पान किया, चाहे तीर्थ का नीर पिया न पिया
गुरु के उपदेश व सत्सँग को, श्रद्धापूर्वक जो ग्रहण करे
‘ब्रह्मानंद’ स्वरूप को जान लिया, चाहे साधन योग किया न किया

Kali Nam Kam Taru Ram Ko

राम स्मरण
कलि नाम कामतरु राम को
दलनिहार दारिद दुकाल दुख, दोष घोर धन धाम को
नाम लेत दाहिनों होत मन वाम विधाता वाम को
कहत मुनीस महेस महातम, उलटे सूधे नाम को
भलो लोक – परलोक तासु जाके बल ललित – ललाम को
‘तुलसी’ जग जानियत नामते, सोच न कूच मुकाम को

Are Man Jap Le Prabhu Ka Nam

नाम स्मरण
अरे मन जप ले प्रभु का नाम
पाँच तत्व का बना पींजरा, मढ़ा उसी पर चाम
आज नहीं कल छूट जायगा, भज ले करुणाधाम
द्रुपद-सुता ने उन्हें पुकारा, वसन रूप भये श्याम
श्रद्धा-भाव रहे मन में नित, जपो प्रभु का नाम
अजामील ने पुत्र-भाव से, नारायण का लिया नाम
सुलभ हो गई सद्गति उसको, पहुँचा उन के धाम
आर्तजनों के वे हितकारी, भज मन आठों याम
सब सुकृत का सार यही, भज राधा-कृष्ण ललाम  

Ram Nam Matu Pita Swami Samarath Hitu

राम नाम आश्रय
राम नाम मातु-पिता, स्वामि समरथ, हितू
आस रामनाथ की , भरोसो राम नाम को
प्रेम राम नाम ही सों, नेम राम नाम ही को
जानौ, राम नाम मर्म, अन्य नहीं काम को
स्वारथ सकल परमारथ को राम नाम
राम नाम हीन ‘तुलसी’ एकमात्र नाम को
राम की शपथ सरबस मेरे राम नाम
कामधेनु-कल्पतरु, मोसे दीन हीन को