Jay Ganesh Gan Nath Dayamay

श्री गणेश स्तवन
जय गणेश गणनाथ दयामय, दूर करो सब विघ्न हमारे
प्रथम धरे जो ध्यान तुम्हारो, उनके सारे काज सँवारे
लंबोदर गजवदन मनोहर, बज्रांकुश को कर में धारे
ऋद्धि-सिद्धि दोऊ चँवर डुलावैं, मूषक वाहन आप पधारे
ब्रह्मादिक सुर ध्यावें मन में, ऋषि मुनिगण सब दास तुम्हारे
‘ब्रह्मानंद’ सहाय करो प्रभु, भक्तजनों के तुम रखवारे

Ramanuj Lakshman Ki Jay Ho

श्री लक्ष्मण
रामानुज लक्ष्मण की जय हो
भगवान् राम के भक्तों का, सारे संकट को हरते हो
शेषावतार को लिये तुम्ही, पृथ्वी को धारण करते हो
हो प्राणनाथ उर्मिला के, सौमित्र तुम्हीं कहलाते हो
महान पराक्रमी, सत्-प्रतिज्ञ, रघुवर के काज सँवारते हो
मुनि विश्वामित्र, जनक राजा, श्री रामचन्द्र के प्यारे हो
अभिमान परशुरामजी का जो भी, तुम ही तो उसे मिटाते हो
अनुरक्त राम की सेवा में, दिन रात तुम्ही तो रहते हो

Jay Durge Durgati Dukh Harini

दुर्गादेवी स्तवन
जय दुर्गे दुर्गति दुःख हारिणि, शुंभ विदारिणि, मात भवानी
आदि शक्ति परब्रह्म स्वरूपिणि, जग जननी माँ वेद बखानी
ब्रह्मा, शिव, हरि अर्चन कीनो, ध्यान धरत सुर-नर-मुनि-ज्ञानी
अष्ट भुजा, कर खंग बिराजे, सिंह सवार सकल वरदानी
‘ब्रह्मानंद’ शरण में आयो, भव-भय नाश करो महारानी 

Om Jay Ganpati Deva

गणपति की आरती
ॐ जय गणपति देवा, प्रभु जय गणपति देवा
जयति शिवा-शिव नन्दन, सन्त करे सेवा —-ॐ जय……
अघ नाशक, वर दाता, भक्तों के भूषण —-प्रभु भक्तों……
ॠद्धि-सिद्धि के दाता, दूर करें दूषण —-ॐ जय……
श्रुति अरु यज्ञ विभूषित, विघ्नों के हर्ता —-प्रभु विघ्नों ……
सुख-निधि शांति-निकेतन, बुद्धि विमलकर्ता —-ॐ जय ……
सुर, नर, मुनि गण वन्दित, शोभा अति न्यारी —-प्रभु शोभा ……
चन्द्र भाल पर शोभित, चार भुजा धारी —-ॐजय……
एक दन्त लम्बोदर, गज का ही मुखड़ा —-प्रभु गज ……
वक्रतुण्ड पीताम्बर, हर लेते दुखड़ा —-ॐ जय……
कोटि सूर्य सम आभा, मात उमा मोहे —-प्रभु मात……
मोदक प्रिय वरदाता, पाशांकुश सोहे —-ॐ जय…..
विद्या, धन, अरु सन्तति, मुद-मंगल दाता —-प्रभु मुद……
विघ्नेश्वर आराधक, सुख सम्पत्ति पाता —-ॐ जय……
श्री गणेशजी की आरती, जो कोई नर गाये —-प्रभु जो ……
अशुभ मिटे, शुभ आये, इच्छित फल पाये —-जय……

Aaj Rawal Main Jay Jaykar

श्रीश्री राधा प्राकट्य
आज रावल में जय-जयकार
भयो यहाँ वृषभानु गोप के, श्री राधा अवतार
सज-धज के सब चलीं वेग तें, गावत मंगलाचार
पृथ्वी पर त्रिभुवन की शोभा, रूप रासि सुखसार
निरखत गावत देत बधाई, तभी भीर भई द्वार
‘परमानँद’ वृषभानु- नंदिनी, जोरी नंदकुमार

Jay Dev Jay Dev

गणपति की आरती
जय देव, जय देव
जय गणेश दुख हर्ता, विघ्न नाश कर्ता, करुणा,
प्रेम प्रदाता, मन वांछित दाता
श्री विग्रह पर उबटन, सिंदुर का सोहे,
कमल पुष्प मुक्ता की, माला मन मोहे
केसर-कुंकुम-चंदन, तिलक भाल साजे,
स्वर्ण-मुकुट रत्नों का, सिर पर अति भ्राजे
कंचन की सी आभा, पीताम्बर छाजे,
श्री चरणों में नूपुर, रुनक झुनक बाजे
वक्रतुण्ड, लम्बोदर, पाशांकुश धारी,
वर मुद्रा कर मोदक, शोभा अति भारी
श्रद्धा से स्मरण करे, शरण जो भी जाए,
गणपति की कर सेवा, सकल सिद्धि पाए
मंगलमूर्ति गजानन, अटल शांति के धाम,
आरती करूँ तुम्हारी, शत शत करूँ प्रणाम

Chaitanya Maha Prabhu Ki Jay Jay

चैतन्य महाप्रभु
चैतन्य महाप्रभु की जय जय, जो भक्ति भाव रस बरसाये
वे विष्णुप्रिया के प्राणनाथ, इस धरा धाम पर जो आये
वे शचीपुत्र गौरांग देव प्रकटे, सबके मन हर्षाये
हे देह कान्ति श्री राधा सी, जो भक्तों के मन को भाये
रस के सागर चैतन्य देव, श्री गौर चन्द्र वे कहलाये
आसक्ति शून्य वह भक्त वेष, जो हरि कीर्तन में सुख पाये
वे भाव राधिका से भावित, प्रेमामृत को जो बरसाये
हो शुद्ध प्रेम इनके जैसा, अज्ञान अविद्या मिट जाये
नयनों से अश्रु गिरे उनके, तो प्रेम छलक बाहर आये
हो कृपा राधिका रानी की, उसका परलोक सुधर जाये
सत्संग कीर्तन नित्य करें, मानव जीवन में सुख पाये

Om Jay Jagdish Hare

जगदीश्वर आरती
ॐ जय जगदीश हरे, प्रभु! जय जगदीश हरे
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे —-ॐ जय …..
जो ध्यावे फल पावे, दुख विनसे मन का —-प्रभु दुख….
सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का —-ॐ जय ….
माता-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी —-प्रभु शरण ….
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी —-ॐ जय …..
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी —-प्रभु तुम ….
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी —-ॐ जय …..
तुम करुणा के सागर, तुम पालन कर्ता —-प्रभु तुम …..
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता —-ॐ जय …..
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति —-प्रभु सबके …..
किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति —-ॐ जय …
दीनबन्धु दुख-हर्ता, तुम ठाकुर मेरे —-प्रभु तुम ….
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे —-ॐ जय …..
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा —-प्रभु पाप …..
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, करुं संत सेवा —-ॐ जय …..

Jay Ganesh Jay Ganesh Jay Ganesh Deva

श्री गणपति स्तुति
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा
माता जिनकी पारबती पिता महादेवा
मोदक का भोग लगे, सन्त करे सेवा
विघ्नों को नाश करें, सुख-सम्पति देवा
एक दन्त लम्बोदर, गज समान आनन
मस्तक सिन्दूर सोहे, मूषक का वाहन
अन्धे को आँख देत, कोढ़ी को काया
बाँझन को है पुत्र देत, निर्धन को माया
दूर्वा और पुष्प चढ़े और चढ़े मेवा
सकल काम सिद्ध करे श्री गणेश देवा

Om Jay Lakshmi Ramana

सत्यनारायण आरती
ॐ जय लक्ष्मीरमणा, प्रभु जय लक्ष्मीरमणा
सत्यनारायण स्वामी, जन-पातक हरणा —-ॐ जय…..
रत्नजटित सिंहासन, अद्भुत छबि राजे —-प्रभु अद्भुत ….
नारद करत निराजन, घंटा धवनि बाजै —-ॐ जय ….
प्रकट भये कलि कारण, द्विज को दरस दियो —-प्रभु द्विज …
बूढ़े ब्राह्मण बनकर, कंचन-महल कियो —-ॐ जय…..
दुर्बल भील व दीन, जिन पर कृपा करी —-प्रभु जिन ….
चन्द्रचूड़ एक राजा, जिनकी विपति हरी —-ॐ जय…..
वैश्य मनोरथ पायो, श्रद्धा तज दीन्ही —-प्रभु श्रद्धा …..
सो फल भोग्यो प्रभुजी, फिर स्तुति कीन्ही —-ॐ जय…..
भाव-भक्ति के कारण, छिन-छिन रूप धर्यो —-प्रभु छिन….
श्रद्धा धारण किन्ही, तिनको काज सर्यो —- —-ॐ जय ….
ग्वाल-बाल सँग राजा, वन में भक्ति करी —-प्रभु वन ….
मनवांछित फल दीन्हो, विपदा आप हरी —-ॐ जय ….
चढ़त प्रसाद सवायो, कदली फल, मेवा —-प्रभु कदली ….
धूप-दीप-तुलसी से, राजी सत देवा —-ॐ जय ….
सत्यदेव की आरति, जो कोई जन गावे —-प्रभु जो ….
सुख सम्पति यश आये, मनवांछित पाये —-ॐ जय ….