Jay Durge Giriraj Nandini

देवी स्तवन
जय दुर्गे गिरिराज नन्दिनी जय अम्बे उज्ज्वल द्युति दामिनि
जय भगवती महादेव भामिनी, जय स्कन्द गजानन पालिनि
कान्तिमयी दुर्गा महारानी, महामर्दिनी वांछित फल दायिनी
हरि, हर ब्रह्मा वेद बखानी, ध्यान धरत सुर-नर-मुनि ज्ञानी
विकसित कमल नयन कात्यायिनि, शंख, पद्म कर धरे भवानी
सत्चित-सुखमय व्याधि विमोचनि, गदा, चक्र, बाणाकुंश शोभिनि
आदि शक्ति चण्डमुण्ड विनाशिनि मधु,कैटभ, महिषासुर मर्दिनि
रत्न हार कटि किंकिणी सोहिनि नक बेसर बिंदी मन मोहिनि
त्रिपुरसुन्दरी भवभय भंजनि, लोक पावनी जय जगजननी

Om Jay Narsingh Hare

नरसिंह आरती
ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह —-हरे प्रभु ….
चरण-कमल जो ध्याये, संकट दूर करे —-ॐ …..
खम्भ फाड़ के श्री हरि, लियो आप अवतार —-प्रभु ….
सिंह रूप को धार्यो, महिमा अपरम्पार —-ॐ ….
मुख जिह्वा भयकारी, उग्ररूप धारी —-प्रभु ….
नाटी मोटी गरदन, अस्त्र-शस्त्र भारी —-ॐ जय ….
नख से उदर विदारे, हिरणाकुश मारे —- —-प्रभु ….
भक्त प्रहलाद के सिर पे, वरद हस्त धारे —-ॐ जय ….
असुर-बाल कर स्तुति, हरि के चरण परे —-प्रभु ….
भक्तवछल वर दाता, राज्य प्रदान करे —-ॐ ….
नरहरि की यह आरति, श्रद्धा से गाये —-प्रभु ….
चरण-कमल का आश्रय, शुभ गति को पाये —-ॐ ….

Jay Ganesh Gan Nath Dayamay

श्री गणेश स्तवन
जय गणेश गणनाथ दयामय, दूर करो सब विघ्न हमारे
प्रथम धरे जो ध्यान तुम्हारो, उनके सारे काज सँवारे
लंबोदर गजवदन मनोहर, बज्रांकुश को कर में धारे
ऋद्धि-सिद्धि दोऊ चँवर डुलावैं, मूषक वाहन आप पधारे
ब्रह्मादिक सुर ध्यावें मन में, ऋषि मुनिगण सब दास तुम्हारे
‘ब्रह्मानंद’ सहाय करो प्रभु, भक्तजनों के तुम रखवारे

Jay Bajarangi Kesari Nandan

श्री हनुमान स्तुति
जय बजरंगी केसरीनंदन, जय जय पवन कुमार
जय गिरि धारक, लंका जारक, हारक व्याधि विकार
जय जग वन्दन असुर निकंदन, जय दुरन्त हनुमान
जय सुख दाता, संकट त्राता, जय कलि के भगवान
जय बल सागर, अतिशय नागर, जय करुणा के धाम
जय दुख भंजन, जन मन रंजन, रामदूत निष्काम
जय हो जय हो करुणा सागर! वर दो हे गुण-धाम
जगत जननी सीता के प्रिय हो, उर-आँगन में राम 

Jay Jay Jag Janani Devi

पार्वती वन्दना
जय जय जग-जननि देवि, सुर-नर-मुनि-असुर-सेवी
भुक्ति-मुक्ति-दायिनि, भय-हरणि कालिका
मंगल-मुद-सिद्धि-सदनि, पर्व शर्वरीश-वदनि
ताप-तिमिर-तरुण-तरणि-किरण-पालिका
वर्म-चर्म कर कृपाण, शूल-शेल धनुष बाण
धरणि दलनि दानव दल रण करालिका
पूतना-पिशाच-प्रेत-डाकिनी-शाकिनि समेत
भूत-ग्रह-बेताल-खग-मृगाल-जालिका
जय महेश-भामिनी, अनेक रूप नामिनी
समस्त लोक स्वामिनी, हिम-शैल बालिका
रघुपति-पद-परम प्रेम, ‘तुलसी’ यह अचल नेम
देहु ह्वै प्रसन्न पाहि प्रणत-पालिका

Jay Shri Ram Hare

रामचन्द्र आरती
श्री राम हरे ॐ जय रघुवीर हरे
आरती करूँ तुम्हारी, संकट सकल टरे
कौशल्या-सुखवर्धन, नृप दशरथ के प्रान
श्री वैदेही-वल्लभ, भक्तों की प्रभु आन —-ॐ जय …
सत्-चित्-आनन्द रूपा, मनुज रूप धारी
शिव, ब्रह्मा, सुर वन्दित, महिमा अति भारी —-ॐ जय …
श्रीविग्रह की आभा, नव नीरद सम श्याम —-
सुभग सरोरुह लोचन, चितवन सौम्य ललाम —-ॐ जय …
कोटि मदन को लाजत, ॠषि-मुनि मन मोहे
पीताम्बर कटि राजत, रविकर द्युति सोहे —-ॐ जय …
रत्न हार गल शोभित, कुण्डल रुचिकारी —-
राजपाट सुख त्यागे, धनुष बाण धारी —-ॐ जय …
गौतम-नारि अहिल्या, शबरी को तारी —-
शिव धनु भंजत हरषे, मिथिला नर नारी —-ॐ जय …
रावणादि निशिचरगण, संहारे रघुवीर
मर्यादा पुरुषोत्तम, हरो हृदय की पीर —-ॐ जय … 

Jay Durge Durgati Dukh Harini

दुर्गादेवी स्तवन
जय दुर्गे दुर्गति दुःख हारिणि, शुंभ विदारिणि, मात भवानी
आदि शक्ति परब्रह्म स्वरूपिणि, जग जननी माँ वेद बखानी
ब्रह्मा, शिव, हरि अर्चन कीनो, ध्यान धरत सुर-नर-मुनि-ज्ञानी
अष्ट भुजा, कर खंग बिराजे, सिंह सवार सकल वरदानी
‘ब्रह्मानंद’ शरण में आयो, भव-भय नाश करो महारानी 

Jay Bhuwaneshwari Jay Narayani

देवी स्तवन
जय भुवनेश्वरि जय नारायणि संतति की रक्षा करती हो
अज्ञान, अहं को हरती हो, सुख वैभव हमको देती हो
जैसे प्रभात की सूर्य किरण, वैसी श्री अंगों की शोभा
मुसकान अधर पर छाई है, रत्नाभूषण की अमित प्रभा
आये जो शरण दीन पीड़ित उसकी रक्षा माँ ही करती
हे सनातनी हे कात्यायिनि, सेवक के कष्ट सदा हरती
वरदायिनि, सर्वेश्वरि मैया, आसक्ति अविद्या आप हरो
माँ दुर्गुण सारे दूर करो, सद्गुण व शांति प्रदान करो 

Jay Jay Jay Giriraj Kishori

पार्वती वन्दना
जय-जय-जय गिरिराजकिशोरी
जय महेश मुखचंद्र चकोरी
जय गजवदन षडानन माता
जग-जननी दामिनि-द्युति दाता
नहिं तव आदि मध्य अवसाना
अमित प्रभाव वेद नहीं जाना
भव-भय-विभव पराभव कारिणि
विश्व-विमोहिनि स्वबस विहारिणि

Jay Jay Bal Krishna

कृष्ण आरती
जय जय बालकृष्ण शुभकारी, मंगलमय प्रभु की छबि न्यारी
रत्न दीप कंचन की थारी, आरति करें सकल नर-नारी
नन्दकुमार यशोदानन्दन, दुष्ट-दलन, गो-द्विज हितकारी
परब्रह्म गोकुल में प्रकटे, लीला हित हरि नर-तनु धारी
नव-जलधर सम श्यामल सुन्दर, घुटुरन चाल अमित मनहारी
पीत झगा उर मौक्तिक-माला, केशर तिलक दरश प्रियकारी
दंतुलिया दाड़िम सी दमके, मृदुल हास्य मोहक रुचिकारी
कर-कंकण, चरणों में नूपुर गूँजत आँगन में झंकारी
मुग्ध होत ब्रज के नर नारी, तन मन या छबि ऊपर वारी
वेद-पुराण विमल यश गाये, सुषमा-सागर कलि-मल हारी