Jay Jayti Jay Raghuvansh Bhushan

श्री राम वन्दना
जय जयति जय रघुवंशभूषण राम राजिवलोचनम्
त्रैताप खंडन जगत्-मंडन ध्यानगम्य अगोचरम्
अद्वैत अविनाशी अनिन्दित, मोक्षप्रद अरि गंजनम्
तव शरण भवनिधि-पारदायक, अन्य जगत् विडम्बनम्
हे दीन-दारिद के विदारक, दयासिन्धु कृपाकरम
हे भक्तजन के राम जीवन-मूल मंगल मंगलम्

Om Jay Govind Hare

कृष्ण आरती
ॐ जय गोविन्द हरे, प्रभु जय गोपाल हरे
सत्य सनातन सुन्दर, मन-वच-बुद्धि परे
नव नीरद सम श्यामल, शोभा अति भारी
चपल कमल दल लोचन, ब्रज जन-बलिहारी
शरद पूर्णिमा शशि सम, मुख-मण्डल अभिराम
मृग-मद तिलक विराजत, कुंचित केश ललाम
मोर-मुकुट कर मुरली, पीताम्बर धारी
गल बैजंती माला, राजत बनवारी —-
नवनीत चोर कहावे, विश्वम्भर गोपाल
भव बंधन को काटे, बँधे यशोदा-लाल
राधा के मन रंजन, ब्रजबाला चितचोर
जसुमति नयनन तारे, नन्दित नन्द-किशोर
पार्थ-सारथी होकर, हरा धरा का भार
गीतामृत दोहन कर, किया जगत उद्धार
सुखनिधि, प्रेम के सिन्धु केशव कृष्ण हरे
प्रणत क्लेश को नाशे, मन में मोद भरे
आरतिहर की आरति, जो कोई जन गाये
करे प्रेम से कीर्तन, भव-निधि तर जाये

Chaitanya Maha Prabhu Ki Jay Jay

चैतन्य महाप्रभु
चैतन्य महाप्रभु की जय जय, जो भक्ति भाव रस बरसाये
वे विष्णुप्रिया के प्राणनाथ, इस धरा धाम पर जो आये
वे शचीपुत्र गौरांग देव प्रकटे, सबके मन हर्षाये
हे देह कान्ति श्री राधा सी, जो भक्तों के मन को भाये
रस के सागर चैतन्य देव, श्री गौर चन्द्र वे कहलाये
आसक्ति शून्य वह भक्त वेष, जो हरि कीर्तन में सुख पाये
वे भाव राधिका से भावित, प्रेमामृत को जो बरसाये
हो शुद्ध प्रेम इनके जैसा, अज्ञान अविद्या मिट जाये
नयनों से अश्रु गिरे उनके, तो प्रेम छलक बाहर आये
हो कृपा राधिका रानी की, उसका परलोक सुधर जाये
सत्संग कीर्तन नित्य करें, मानव जीवन में सुख पाये

Mahaveer Aapki Jay Ho

महावीर हनुमान
महावीर आपकी जय जय हो
संताप, शोक, हरने वाले, हनुमान आपकी जय जय हो
सात्विक-गुण बुद्धि के सागर, अंजनी पुत्र की जय जय हो
आनन्द बढ़ाये रघुवर का, केसरी-नंदन की जय जय हो
माँ सीता के दुख दूर किये, इन पवन-पुत्र की जय जय हो
भुज-दण्ड बड़े जिनके प्रचण्ड, रुद्रावतार की जय-जय हो
भव का भय नष्ट करे मेरे, बजरंग बली की जय जय हो 

Jay Ram Rama Ramnam Samanam

श्री राम वन्दना
जय राम रमा- रमनं समनं , भव-ताप भयाकुल पाहिजनं
अवधेस, सुरेस, रमेस विभो, सरनागत माँगत पाहि प्रभो
दस-सीस-बिनासन बीस भुजा, कृत दूरि महा-महि भूरि-रुजा
रजनी-चर-वृन्द-पतंग रहे, सर-पावक-तेज प्रचंड दहे
महि-मंडल-मंडन चारुतरं, धृत-सायक-चाप-निषंग-बरं
मद-मोह-महा ममता-रजनी, तमपुंज दिवाकर-तेज-अनी
मनजात किरात निपात किए, मृग, लोभ कुभोग सरेनहिए
हति नाथ अनाथनि पाहि हरे, विषया वन पाँवर भूलि परे
बहु रोग वियोगन्हि लोग हए, भव दंघ्रि निरादर के फल ए
भव-सिन्धु अगाध परे नर ते, पद-पंकज-प्रेम न जे करते
अतिदिन मलीन दुखी नितहीं, जिनके पद पंकज प्रति नहीं
अवलंब भवन्त कथा जिन्हकें, प्रिय सन्त अनन्त सदा तिन्हकें
नहि राग न लोभ न मान मदा, तिन्हके सम वैभव वा विपदा
एहि ते तव सेवक होत मुदा, मुनि त्यागत जोग भरोस सदा
करि प्रेम निरन्तर नेम लिए, पद पंकज सेवत शुद्ध हिए
सम मानि निरादर आदर ही, सब सन्त सुखी विचरन्त मही
मुनि मानस पंकज भृंग भजे, रघुवीर महा रनधीर अजे
तब नाम जपामि ननामि हरी, भव रोग महागद मान अरी
गुनसील कृपा परमायतनं, प्रनमामि निरंतर श्री रमनं
रघुनन्द निकन्दय द्वन्द्वघनं, महिपाल विलोकय दीन जनं

Jay Surya Dev Kashyap Nandan

सूर्यनारायण आरती
जय सूर्यदेव कश्यप-नन्दन, हम बारम्बार करे वन्दन
‘तमसो-मा-ज्योतिर्गमय’ प्रभो, सब रोग भगाने वारे हो
आरूढ़ सप्त अश्वों के रथ, राजत किरीट केयूरवान्
प्रभु तेजरूप कर चक्र पद्म, त्रिभुवन के तुम्ही उजारे हो
रविमण्डल बिच पद्मासन पर, साकार ब्रह्म हे नारायण
गल रत्नहार कुण्डल भूषित, सावित्री राजदुलारे हो
जड़ चेतन के तुम स्वामी हो, हे दिनमणि अंशुमान सविता
हे महातपा वर्षा करते, जगती के तुम्ही सहारे हो
कर्मों के साक्षी विश्वबोध, अज्ञान, मोह को हर लीजै
दीर्घायु, स्वास्थ्य, प्रतिभा दीजै, भव-ताप निवारण-हारे हो

Jay Ganesh Jay Ganesh Jay Ganesh Deva

श्री गणपति स्तुति
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा
माता जिनकी पारबती पिता महादेवा
मोदक का भोग लगे, सन्त करे सेवा
विघ्नों को नाश करें, सुख-सम्पति देवा
एक दन्त लम्बोदर, गज समान आनन
मस्तक सिन्दूर सोहे, मूषक का वाहन
अन्धे को आँख देत, कोढ़ी को काया
बाँझन को है पुत्र देत, निर्धन को माया
दूर्वा और पुष्प चढ़े और चढ़े मेवा
सकल काम सिद्ध करे श्री गणेश देवा

Mo Se Kaha Na Jay Kaha Na Jay

मोहन के गुण
मो से कहा न जाय, कहा न जाय,
मनमोहन के गुण सारे
अविनाशी घट घट वासी, यशुमति नन्द दुलारे
लाखों नयना दरस के प्यासे, वे आँखों के तारे
गोपियन के संग रास रचाये, मुरलीधर मतवारे
शरद पूर्णिमा की रजनी थी, रास रचायो प्यारे
उनके गुण सखि कितने गाऊँ, वे सर्वस्व हमारे 

Nato Nam Ko Mosu Tanak Na Todyo Jay

गाढ़ी प्रीति
नातो नाम को मोसूँ, तनक न तोड्यो जाय
पानाँ ज्यूँ पीली पड़ी रे, लोग कहै पिंड रोग
छाने लँघन मैं कियो रे, श्याम मिलण के जोग
बाबुल वैद बुलाइया रे, पकड़ दिखाई म्हाँरी बाँह
मूरख वैद मरम नहि जाणे, दरद कलेजे माँह
जाओ वैद घर आपणे रे, म्हाँरो नाम न लेय
‘मीराँ’ तो है जरी विरह की, काहे कूँ औषध देय
माँस तो तन को छीजिया रे, शक्ति जरा भी नाहिं
आँगुलियाँ की मूँदड़ी म्हारे, आवण लागी बाँहि

Om Jay Lakshmi Mata

महालक्ष्मी आरती
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया तुम ही जग धाता
सद्गुण, सम्पति दाता, भव-भय की त्राता
पराशक्ति परमेश्वरि, सच्चिदानन्दमयी
गरुड़ारूढ़ महेश्वरि, अनुपम नित्य नयी
उज्ज्वल वसन, सुहासिनि, श्रीविग्रह सोहे
महाशक्ति सम्मोहिनि, त्रिभुवन मन मोहे
चन्द्र समान प्रकाशित, छाजे मणि-मुक्ता
रत्नमाल गल शोभित, स्वर्ण रजत युक्ता
श्रीसूक्त से पूजित, कमला महारानी
हरि-हर-ब्रह्मा वन्दित, स्नेहमयी दानी
क्षीर-समुद्र विहारिणि, शोभा रुचिकारी
पारब्रह्म श्रुतिरूपिणि, ॠषि-मुनि मनहारी
महालक्ष्मी आल्हादिनि, सरसिज-पुष्प निवास
शुभ, ऐश्वर्य-प्रदायिनि, कीरति वित्त विलास
निर्मल जल अभिसिंचित, दिग्गज के द्वारा
दीजै वर मनवांछित, बहे ‘कनक धारा’
आदि-अन्त रहित माँ, मुखमण्डल अभिराम
कृपा-कटाक्ष करो माँ, बारंबार प्रणाम