Aaj Rawal Main Jay Jaykar

श्रीश्री राधा प्राकट्य
आज रावल में जय-जयकार
भयो यहाँ वृषभानु गोप के, श्री राधा अवतार
सज-धज के सब चलीं वेग तें, गावत मंगलाचार
पृथ्वी पर त्रिभुवन की शोभा, रूप रासि सुखसार
निरखत गावत देत बधाई, तभी भीर भई द्वार
‘परमानँद’ वृषभानु- नंदिनी, जोरी नंदकुमार

Jay Dev Jay Dev

गणपति की आरती
जय देव, जय देव
जय गणेश दुख हर्ता, विघ्न नाश कर्ता, करुणा,
प्रेम प्रदाता, मन वांछित दाता
श्री विग्रह पर उबटन, सिंदुर का सोहे,
कमल पुष्प मुक्ता की, माला मन मोहे
केसर-कुंकुम-चंदन, तिलक भाल साजे,
स्वर्ण-मुकुट रत्नों का, सिर पर अति भ्राजे
कंचन की सी आभा, पीताम्बर छाजे,
श्री चरणों में नूपुर, रुनक झुनक बाजे
वक्रतुण्ड, लम्बोदर, पाशांकुश धारी,
वर मुद्रा कर मोदक, शोभा अति भारी
श्रद्धा से स्मरण करे, शरण जो भी जाए,
गणपति की कर सेवा, सकल सिद्धि पाए
मंगलमूर्ति गजानन, अटल शांति के धाम,
आरती करूँ तुम्हारी, शत शत करूँ प्रणाम

Chaitanya Maha Prabhu Ki Jay Jay

चैतन्य महाप्रभु
चैतन्य महाप्रभु की जय जय, जो भक्ति भाव रस बरसाये
वे विष्णुप्रिया के प्राणनाथ, इस धरा धाम पर जो आये
वे शचीपुत्र गौरांग देव प्रकटे, सबके मन हर्षाये
हे देह कान्ति श्री राधा सी, जो भक्तों के मन को भाये
रस के सागर चैतन्य देव, श्री गौर चन्द्र वे कहलाये
आसक्ति शून्य वह भक्त वेष, जो हरि कीर्तन में सुख पाये
वे भाव राधिका से भावित, प्रेमामृत को जो बरसाये
हो शुद्ध प्रेम इनके जैसा, अज्ञान अविद्या मिट जाये
नयनों से अश्रु गिरे उनके, तो प्रेम छलक बाहर आये
हो कृपा राधिका रानी की, उसका परलोक सुधर जाये
सत्संग कीर्तन नित्य करें, मानव जीवन में सुख पाये

Om Jay Jagdish Hare

जगदीश्वर आरती
ॐ जय जगदीश हरे, प्रभु! जय जगदीश हरे
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे —-ॐ जय …..
जो ध्यावे फल पावे, दुख विनसे मन का —-प्रभु दुख….
सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का —-ॐ जय ….
माता-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी —-प्रभु शरण ….
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी —-ॐ जय …..
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी —-प्रभु तुम ….
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी —-ॐ जय …..
तुम करुणा के सागर, तुम पालन कर्ता —-प्रभु तुम …..
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता —-ॐ जय …..
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति —-प्रभु सबके …..
किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति —-ॐ जय …
दीनबन्धु दुख-हर्ता, तुम ठाकुर मेरे —-प्रभु तुम ….
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे —-ॐ जय …..
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा —-प्रभु पाप …..
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, करुं संत सेवा —-ॐ जय …..

Jay Ganesh Jay Ganesh Jay Ganesh Deva

श्री गणपति स्तुति
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा
माता जिनकी पारबती पिता महादेवा
मोदक का भोग लगे, सन्त करे सेवा
विघ्नों को नाश करें, सुख-सम्पति देवा
एक दन्त लम्बोदर, गज समान आनन
मस्तक सिन्दूर सोहे, मूषक का वाहन
अन्धे को आँख देत, कोढ़ी को काया
बाँझन को है पुत्र देत, निर्धन को माया
दूर्वा और पुष्प चढ़े और चढ़े मेवा
सकल काम सिद्ध करे श्री गणेश देवा

Om Jay Lakshmi Ramana

सत्यनारायण आरती
ॐ जय लक्ष्मीरमणा, प्रभु जय लक्ष्मीरमणा
सत्यनारायण स्वामी, जन-पातक हरणा —-ॐ जय…..
रत्नजटित सिंहासन, अद्भुत छबि राजे —-प्रभु अद्भुत ….
नारद करत निराजन, घंटा धवनि बाजै —-ॐ जय ….
प्रकट भये कलि कारण, द्विज को दरस दियो —-प्रभु द्विज …
बूढ़े ब्राह्मण बनकर, कंचन-महल कियो —-ॐ जय…..
दुर्बल भील व दीन, जिन पर कृपा करी —-प्रभु जिन ….
चन्द्रचूड़ एक राजा, जिनकी विपति हरी —-ॐ जय…..
वैश्य मनोरथ पायो, श्रद्धा तज दीन्ही —-प्रभु श्रद्धा …..
सो फल भोग्यो प्रभुजी, फिर स्तुति कीन्ही —-ॐ जय…..
भाव-भक्ति के कारण, छिन-छिन रूप धर्यो —-प्रभु छिन….
श्रद्धा धारण किन्ही, तिनको काज सर्यो —- —-ॐ जय ….
ग्वाल-बाल सँग राजा, वन में भक्ति करी —-प्रभु वन ….
मनवांछित फल दीन्हो, विपदा आप हरी —-ॐ जय ….
चढ़त प्रसाद सवायो, कदली फल, मेवा —-प्रभु कदली ….
धूप-दीप-तुलसी से, राजी सत देवा —-ॐ जय ….
सत्यदेव की आरति, जो कोई जन गावे —-प्रभु जो ….
सुख सम्पति यश आये, मनवांछित पाये —-ॐ जय ….

Jay Jay Jay Durga Maharani

दुर्गा स्तुति
जय जय जय दुर्गा महारानी, दर्शन दो दुर्गा महारानी
विश्व विमोहित करने वाली, तीन लोक में रहने वाली
जग जननी, जय माँ कल्याणी, दर्शन दो दुर्गा महारानी
पाप नाश कर देने वाली, दुख विपत्ति को हरने वाली
सिंहवाहिनी, मातु भवानी, दर्शन दो दुर्गा महारानी
श्रद्धा करुणा भक्ति स्वरूपा, सुख वैभव को देने वाली
विन्ध्य वासिनी शांत भवानी, दर्शन दो दुर्गा महारानी

Om Jay Narsingh Hare

नरसिंह आरती
ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह —-हरे प्रभु ….
चरण-कमल जो ध्याये, संकट दूर करे —-ॐ …..
खम्भ फाड़ के श्री हरि, लियो आप अवतार —-प्रभु ….
सिंह रूप को धार्यो, महिमा अपरम्पार —-ॐ ….
मुख जिह्वा भयकारी, उग्ररूप धारी —-प्रभु ….
नाटी मोटी गरदन, अस्त्र-शस्त्र भारी —-ॐ जय ….
नख से उदर विदारे, हिरणाकुश मारे —- —-प्रभु ….
भक्त प्रहलाद के सिर पे, वरद हस्त धारे —-ॐ जय ….
असुर-बाल कर स्तुति, हरि के चरण परे —-प्रभु ….
भक्तवछल वर दाता, राज्य प्रदान करे —-ॐ ….
नरहरि की यह आरति, श्रद्धा से गाये —-प्रभु ….
चरण-कमल का आश्रय, शुभ गति को पाये —-ॐ ….

Jay Jay Jag Janani Devi

पार्वती वन्दना
जय जय जग-जननि देवि, सुर-नर-मुनि-असुर-सेवी
भुक्ति-मुक्ति-दायिनि, भय-हरणि कालिका
मंगल-मुद-सिद्धि-सदनि, पर्व शर्वरीश-वदनि
ताप-तिमिर-तरुण-तरणि-किरण-पालिका
वर्म-चर्म कर कृपाण, शूल-शेल धनुष बाण
धरणि दलनि दानव दल रण करालिका
पूतना-पिशाच-प्रेत-डाकिनी-शाकिनि समेत
भूत-ग्रह-बेताल-खग-मृगाल-जालिका
जय महेश-भामिनी, अनेक रूप नामिनी
समस्त लोक स्वामिनी, हिम-शैल बालिका
रघुपति-पद-परम प्रेम, ‘तुलसी’ यह अचल नेम
देहु ह्वै प्रसन्न पाहि प्रणत-पालिका

Jay Jayati Jay Raghuvansh Bhushan

श्रीराम स्तुति
जय जयति जय रघुवंश भूषण, राम राजिव लोचनम्
त्रय ताप खण्डन जगत् मण्डन ध्यान गम्य अगोचरम्
अद्वैत अविनाशी अनिन्दित, मोद प्रद अरि गंजनम्
भव वारिधि के आप तारक, अन्य जगत् विडम्बनम्
हे दीन दारिद के विदारक! दयासिन्धु कृपा करम्
हे आश्रितों के आप पालक! दु:ख शोक विनाशकम्