Muraliya Mat Baje Ab Aur

मुरली का जादू
मुरलिया! मत बाजै अब और
हर्यौ सील-कुल-मान करी बदनाम मोय सब ठौर
रह्यो न मोपै जाय सुनूँ जब तेरी मधुरी तान
उमगै हियौ, नैन झरि लागै, भाजन चाहैं प्रान
कुटिल कान्ह धरि तोय अधर पर, राधा राधा टेरे
रहै न मेरौ मन तब बस में, गिनै न साँझ सवेरे

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