Jay Dev Jay Dev

गणपति की आरती
जय देव, जय देव
जय गणेश दुख हर्ता, विघ्न नाश कर्ता, करुणा,
प्रेम प्रदाता, मन वांछित दाता
श्री विग्रह पर उबटन, सिंदुर का सोहे,
कमल पुष्प मुक्ता की, माला मन मोहे
केसर-कुंकुम-चंदन, तिलक भाल साजे,
स्वर्ण-मुकुट रत्नों का, सिर पर अति भ्राजे
कंचन की सी आभा, पीताम्बर छाजे,
श्री चरणों में नूपुर, रुनक झुनक बाजे
वक्रतुण्ड, लम्बोदर, पाशांकुश धारी,
वर मुद्रा कर मोदक, शोभा अति भारी
श्रद्धा से स्मरण करे, शरण जो भी जाए,
गणपति की कर सेवा, सकल सिद्धि पाए
मंगलमूर्ति गजानन, अटल शांति के धाम,
आरती करूँ तुम्हारी, शत शत करूँ प्रणाम

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