Nato Nam Ko Mosu Tanak Na Todyo Jay

गाढ़ी प्रीति
नातो नाम को मोसूँ, तनक न तोड्यो जाय
पानाँ ज्यूँ पीली पड़ी रे, लोग कहै पिंड रोग
छाने लँघन मैं कियो रे, श्याम मिलण के जोग
बाबुल वैद बुलाइया रे, पकड़ दिखाई म्हाँरी बाँह
मूरख वैद मरम नहि जाणे, दरद कलेजे माँह
जाओ वैद घर आपणे रे, म्हाँरो नाम न लेय
‘मीराँ’ तो है जरी विरह की, काहे कूँ औषध देय
माँस तो तन को छीजिया रे, शक्ति जरा भी नाहिं
आँगुलियाँ की मूँदड़ी म्हारे, आवण लागी बाँहि

Jay Durge Giriraj Nandini

देवी स्तवन
जय दुर्गे गिरिराज नन्दिनी जय अम्बे उज्ज्वल द्युति दामिनि
जय भगवती महादेव भामिनी, जय स्कन्द गजानन पालिनि
कान्तिमयी दुर्गा महारानी, महामर्दिनी वांछित फल दायिनी
हरि, हर ब्रह्मा वेद बखानी, ध्यान धरत सुर-नर-मुनि ज्ञानी
विकसित कमल नयन कात्यायिनि, शंख, पद्म कर धरे भवानी
सत्चित-सुखमय व्याधि विमोचनि, गदा, चक्र, बाणाकुंश शोभिनि
आदि शक्ति चण्डमुण्ड विनाशिनि मधु,कैटभ, महिषासुर मर्दिनि
रत्न हार कटि किंकिणी सोहिनि नक बेसर बिंदी मन मोहिनि
त्रिपुरसुन्दरी भवभय भंजनि, लोक पावनी जय जगजननी

Om Jay Lakshmi Mata

महालक्ष्मी आरती
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया तुम ही जग धाता
सद्गुण, सम्पति दाता, भव-भय की त्राता
पराशक्ति परमेश्वरि, सच्चिदानन्दमयी
गरुड़ारूढ़ महेश्वरि, अनुपम नित्य नयी
उज्ज्वल वसन, सुहासिनि, श्रीविग्रह सोहे
महाशक्ति सम्मोहिनि, त्रिभुवन मन मोहे
चन्द्र समान प्रकाशित, छाजे मणि-मुक्ता
रत्नमाल गल शोभित, स्वर्ण रजत युक्ता
श्रीसूक्त से पूजित, कमला महारानी
हरि-हर-ब्रह्मा वन्दित, स्नेहमयी दानी
क्षीर-समुद्र विहारिणि, शोभा रुचिकारी
पारब्रह्म श्रुतिरूपिणि, ॠषि-मुनि मनहारी
महालक्ष्मी आल्हादिनि, सरसिज-पुष्प निवास
शुभ, ऐश्वर्य-प्रदायिनि, कीरति वित्त विलास
निर्मल जल अभिसिंचित, दिग्गज के द्वारा
दीजै वर मनवांछित, बहे ‘कनक धारा’
आदि-अन्त रहित माँ, मुखमण्डल अभिराम
कृपा-कटाक्ष करो माँ, बारंबार प्रणाम

Patiyan Main Kaise Likhu Likhi Hi Na Jay

विरह व्यथा
पतियाँ मैं कैसे लिखूँ, लिखि ही न जाई
कलम धरत मेरो कर कंपत है, हियड़ो रह्यो घबराई
बात कहूँ पर कहत न आवै, नैना रहे झर्राई
किस बिधि चरण कमल मैं गहिहौं, सबहि अंग थर्राई
‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, बेगि मिल्यो अब आई

Jay Bajarangi Kesari Nandan

श्री हनुमान स्तुति
जय बजरंगी केसरीनंदन, जय जय पवन कुमार
जय गिरि धारक, लंका जारक, हारक व्याधि विकार
जय जग वन्दन असुर निकंदन, जय दुरन्त हनुमान
जय सुख दाता, संकट त्राता, जय कलि के भगवान
जय बल सागर, अतिशय नागर, जय करुणा के धाम
जय दुख भंजन, जन मन रंजन, रामदूत निष्काम
जय हो जय हो करुणा सागर! वर दो हे गुण-धाम
जगत जननी सीता के प्रिय हो, उर-आँगन में राम 

Om Jay Ambe Gouri

दुर्गाजी आरती
ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय दुर्गा गौरी
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिव री
माँग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्र वदन नीको
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै
रक्त-पुष्प उर माला, रत्न हार साजै
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती
कोटिक चंद्र दिवाकर सम राजत ज्योति
शुम्भ, निशुम्भ विदारे, महिषासुर-घाती
धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती
चण्ड मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे
मधु कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे
चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैरू
बाजत ताल मृदंग अरु बाजत डमरू
भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी
मनवांछित फल पावत, सेवत नर-नारी

Piya Bin Rahyo Na Jay

विरह व्यथा
पिया बिन रह्यो न जाय
तन-मन मेरो पिया पर वारूँ, बार-बार बलि जाय
निस दिन जोऊँ बाट पिया की, कब रे मिलोगे आय
‘मीराँ’ को प्रभु आस तुम्हारी, लीज्यो कण्ठ लगाय

Jay Bhuwaneshwari Jay Narayani

देवी स्तवन
जय भुवनेश्वरि जय नारायणि संतति की रक्षा करती हो
अज्ञान, अहं को हरती हो, सुख वैभव हमको देती हो
जैसे प्रभात की सूर्य किरण, वैसी श्री अंगों की शोभा
मुसकान अधर पर छाई है, रत्नाभूषण की अमित प्रभा
आये जो शरण दीन पीड़ित उसकी रक्षा माँ ही करती
हे सनातनी हे कात्यायिनि, सेवक के कष्ट सदा हरती
वरदायिनि, सर्वेश्वरि मैया, आसक्ति अविद्या आप हरो
माँ दुर्गुण सारे दूर करो, सद्गुण व शांति प्रदान करो 

Jay Ganga Maiya

गंगा आरती
जय गंगा मैया, माँ जय सुरसरि मैया
आरती करे तुम्हारी, भव-निधि की नैया
हरि-पद-पद्म-प्रसूति, विमल वारिधारा
ब्रह्म द्रव भागीरथि, शुचि पुण्यागारा
शंकर-जटा विहारिणि, भव-वारिधि-त्राता
सगर-पुत्र गण-तारिणि, स्नेहमयी माता
‘गंगा-गंगा’ जो जन, उच्चारे मुख से
दूर देश स्थित भी, पाये मुक्तिभय से
मृत व्यक्ति की अस्थियाँ जो प्रवेश पाये
वो भी पावन होकर परम धाम जाये
हे माता करुणामयी, शरण मुझे दीजै
आरती करें तुम्हारी, आप कृपा कीजै  

Shyam Binu Rahyo Na Jay

विरह व्यथा
स्याम बिनु रह्यो न जाय
खान पानमोहि फीको लागे, नैणा रहे मुरझाय
बार बार मैं अरज करूँ छूँ, रैण गई दिन जाय
‘मीराँ’ कहे हरि तुम मिलिया बिन, तरस तरस तन जाय