Shri Ram Jape Ham Kaise Hi

राम नाम महिमा
श्री राम जपें हम कैसे ही
उलटा नाम जपा वाल्मीकि ने, ब्रह्मर्षि हो गये वही
लिया अजामिल ने धोखे से नाम तर गया भवसागर
द्रुपद-सुता जब घिरी विपद् से, लाज बचाई नटनागर
गज, गणिका का काम बन गया, प्रभु-कृपा से ही तो
प्रतीति प्रीति हो दो अक्षर में, श्रीराम मिले उसको तो
रामनाम के पत्थर तर गये, सेतु बँधा सागर में
सेना पहुँच गई लंका में, निशिचर मरे समर में

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