Kisori Karat Keli Aangal Main

किसोरी की क्रीड़ा
किसोरी करत केलि आँगन में
चलत फिरत छम छम आँगन में, होत मगन अति मन में
कीरति की है लाड़-लड़ैती, बरसत रस छन छन में
वृषभानू की तो मनभानी, पगी हुई रसघन में
प्रीति-रीति की प्रतिमा पूरी, उपमा नहिं त्रिभुवन में
मेरे तो तन-मन की स्वामिनि, लगी लगन चरणन में

Madhav Mera Moh Mita Do

मोह मिटा दो
माधव! मेरा मोह मिटा दो
किया इसी ने विलग आप से, इसको नाथ हटा दो
जल तरंगवत भेद न तुमसे, इसने भेद कराया
इसही ने कुछ दूर-दूर रख, भव-वन में भटकाया
यही मोह माया है जिसने, तुमसे विरह कराया
जिसका मोह मिटा वह तुमसे निस्संदेह मिल पाया

Udho Braj Ki Yad Satave

ब्रज की याद
ऊधो! ब्रज की याद सतावै
जसुमति मैया कर कमलन की, माखन रोटी भावै
बालपने के सखा ग्वाल, बाल सब भोरे भारे
सब कुछ छोड़ मोहिं सुख दीन्हौ, कैसे जाय बिसारे
ब्रज-जुवतिन की प्रीति -रीति की, कहा कहौं मैं बात
लोक-वेद की तज मरजादा, मो हित नित ललचात
आराधिका, नित्य आराध्या, राधा को लै नाम
चुप रहि गए, बोल नहिं पाए, परे धरनि हिय थाम

Kou Ya Kanha Ko Samujhawe

नटखट कन्हैया
कोउ या कान्हा को समुझावै
कैसो यह बेटो जसुमति को, बहुत ही धूम मचावै
हम जब जायँ जमुन जल भरिबे घर में यह घुस जावै
संग सखा मण्डली को लै यह, गोरस सबहिं लुटावै
छींके धरी कमोरी को सखि, लकुटी सो ढुरकावै
आपु खाय अरु धरती पर, गोरस की कीच बनावै
जब हम जल ले चलहिं जमुन सों, यह काँकरी चलावै
फोर गगरिया बहिना हमरे, सूखे वसन भिंगावै
जित देखें दीखत तित ही यह, कैसो अचरज आवै
कैसी री माया मोहन की, ऊधम ही अति भावै

Mare Jivan Dhan Nandlal

निवेदन
मेरे जीवन धन नंदलाल
तुम बिनु मेरे प्राणनाथ! ये तन मन बहुत विहाल
तरसहिं नयन दरस को निसिदिन, लागहिं भोग बवाल
इसी भाँति सब वयस बिताई, मिले ने तुम गोपाल
कहा करों, कोउ पन्थ न सूझत, कैसे मिलि हो लाल
मेरे जीवन के जीवन तुम, तुम बिनु सब जंजाल
कहा तिहारी बान प्रानधन, तरसावहु बहु काल
एक बार हूँ दरस देहु तो, नयना होय निहाल

Jay Jay Brajraj Kunwar

रूप छटा
जय जय ब्रजराज-कुँवर, राधा मन-हारी
मुरलीधर मधुर अधर, जमुना तट चारी
नील बरन पीत वसन, संग ग्वाल गोपीजन
मुनिमन हर, मंद हँसन, गुंज-माल धारी
निरतत नटवर सुवेष, सोहै सिर मोर-मुकुट
हरत मदन मद असेस, गोपी-सुख-कारी

Kou Re Jaiyo Madhupuri Aur

यशोदा का संदेश
कोउ रे! जइयो मधुपूरि ओर
वहाँ बसत है मेरो लाला सुन्दर नवल किशोर
कहियो वाहि अरे नटखट! क्यों आत न इते बहोर
मैया बिलखि बिलखि जीवति है, तकत न वाकी ओर
माखन सो तेरो हिय लाला, काहे भयो कठोर
मैं तो नित तेरो मग जोऊँ, कान्ह बहोर बहोर
अपुनो ही सुत करि मैं मान्यो, भूल गई सब और
एक बार आ हियरो सिराजा, लगी ललक पुरजोर

Mere Pyare Sanware

प्राणाधार
मेरे प्यारे साँवरे! तुम कित रहे दुराय
आवहु मेरे लाड़िले! प्रान रहे अकुलाय
प्रिया प्रानधन लाड़िले, अटके तुम में प्रान
आवन की आसा लगी, देत न इत उत जान
ललित लड़ैती स्वामिनी! सुषमा की आगार
तू ही पिय के प्रीति की, एकमात्र आधार
आजा मेरे लाड़िले! नयननि रखिहों तोय
ऐसी कर करुना कबहुँ, फेर बिछोह न होय

Jugal Chavi Harati Hiye Ki Pir

युगल छवि
जुगल छवि हरति हिये की पीर
कीर्ति-कुँअरि ब्रजराम-कुँअर बर ठाढ़े जमुना-तीर
कल्पवृच्छ की छाँह सुशीतल, मंद-सुगंध समीर
मुरली अधर, कमल कर कोमल, पीत-नील-द्युति चीर
मुक्ता-मनिमाला, पन्ना गल, सुमन मनोहर हार
भूषन विविध रत्न राजत तन, बेंदी-तिलक उदार
श्रवननि सुचि कुण्डल झुर झूमक, झलकत ज्योति अपार
मुसुकनि मधुर अमिय दृग-चितवनि, बरसत सुधा सिंगार

Khelat Fag Pran Dhan Mohan

होली का रंग
खेलन फाग प्रानधन मोहन, मेरे द्वारे आयो रे
नटवर रूप देखि प्रीतम को, मेरो मन उमगायो रे
संग सखा सब छैल-छबीले, लाल गुलाल उड़ायो रे
सोहत हाथ कनक-पिचकारी, केसर रंग रँगायो रे
ओसर पाइ लई मैं मुरली, काजर नयन लगायो रे
सिर चुंदरी ओढ़ाय लाल को, लाली भेष बनायो रे
घेरि सखिन ने फिर मोहन को, मोहिनी रूप सजायो रे
प्यारी जी मुसकाय रीझि पुनि, आपुहि उन्हें छुड़ायो रे