Bhajan Ko Namahi Nam Bhayo

भजन महिमा
भजन को नामहि नाम भयो
जासों द्रवहि न प्राननाथ, वह कैसे भजन भयो
कर माला, मुख नाम, पै न मन में कोई भाव रह्यो
केवल भयो प्रदरसन, लोगन हूँ ने भगत कह्यो
पायो मानुष जन्म, वृथा ऐसे ही समय गयो
मन में साँची लगन होय सो, साँचो भजन कह्यो
बिरह व्यथा में बीतहिं वासर, रैन न चैन लह्यो
असन वसन हूँ भारी लागें, तो कछु भजन भयो

Shyam Binu Bairin Rain Bhai

विरह व्यथा
स्याम बिनु बैरिन रैन भई
काटे कटत न घटत एक पल, सालत नित्य नई
पल भर नींद नयन नहिं आये, तारे गिनत गई
उलटि-पुलटि करवट लैं काटूँ, ऐसी दशा भई
कहा बात मैं कहूँ गात की, जात न कछु कही
अँखियन में पावस सी छाई, जब पल रूकत नहीं
भये निठुर ऐसे नँदनंदन, सुधि हूँ नाहिं लई
कहा करुँ सजनी मोहन वश, ऐसी दशा भई

Bhajan Bin Jiwan Manahu Masan

भजन महिमा
भजन बिन जीवन मनहुँ मसान
जीवन के जीवन मनमोहन, उन बिन मरन समान
चलत फिरत दीखत जो यह तन,सो जनु प्रेत समान
कहा काम आवहिगो वैभव, जब तन को अवसान
जो कछु मिल्यौ न फल्यौ जगत में, कियो न हरि गुण-गान
है बस यही चातुरी साँची, भजै स्याम रसखान

Hindole Jhulahi Naval Kishor

झूलना
हिंडोले झूलहिं नवल-किसोर
कहा कहों यह सुषमा सजनी! वारिय काम करोर
वरन-वरन के वसन सखिन के, पवन चलत झकझोर
सावन के मनभावन बादर, गड़गड़ाहिं घनघोर
गावहिं सावन गीत मनोहर, भये जुगल रस भोर
या रस के वश भये चराचर, जाको ओर न छोर

Man Tu Kahe Bhayo Achet

प्रबोधन
मन! तू काहे भयो अचेत
भटकत रह्यो व्यर्थ में अब तक, कियो न हरि से हेत
पायो मानुष-जन्म हाय! तू ताहि वृथा कर देत
अरे भूलि हीरा कों बौरे, करत काँच सो हेत
प्राननाथ सों प्रीति न करि तू, पूजत पामर प्रेत
सुमिर सुमिर रे! सदा स्याम को, संतत स्नेह समेत

Are Man Kar Prabhu Par Vishvas

प्रभु का भरोसा
अरे मन कर प्रभु पर विश्वास
भटक रहा क्यों इधर-उधर तूँ, झूठे सुख की आस
सुन्दर देह सुहावनि नारी, सब विधि भोग-विलास
क्या पाया घरबार पुत्र से, मिटी न यम की त्रास
क्षण-भङ्गुर सब भोग निरंतर, बने काल के ग्रास
मिले परम सुख, घटे कभी नहिं, जिनके मन विश्वास

Aaju Jugal Var Raas Rachayo

रास लीला
आजु जुगल वर रास रचायो, कालिन्दी के कूल री सजनी
ब्रह्मा, शिव की मति बौराई, मनसिज के मन सूल री सजनी
बिच बिच गोपी श्याम सुशोभित, जनु मुक्ता-मणि माल री सजनी
बाजहिं बहु-विधि वाद्य अनूपम, राग रंग ध्वनि मीठी री सजनी
भाव भंगि करि नाचहिं गावहिं, उर उमँग्यौ अनुराग री सजनी
कटि किंकिनि की रुन-झुन धुनि सुनि, मुनि मन मोहिं रसाल री सजनी
चढ़िनभ-यान लखहिं सुर, सुर-तिय, बरसहिं सुमन-माल री सजनी

Man Ga Tu Madhav Rag Re

चेतावनी
मन गा तू माधव राग रे, कर माधव से अनुराग रे
कृष्ण भजन को नर तन पाया, यहाँ आय जग में भरमाया
छोड़ छोड़ यह माया छाया, श्याम सुधारस पाग रे
माधव ही तेरा अपना है, और सभी कोरा सपना है
दुनिया से जुड़ना फँसना है, इस बंधन से भाग रे
मोह निशा में बयस बिताई, अन्तकाल की वेला आई
कब तक यों सोयेगा भाई, तू हरि स्मरण हित जाग रे

Aaju In Nayananhi Nirakhe

माधव की मोहिनी
आजु इन नयनन्हि निरखे स्याम
निकसे ह्वै मेरे मारग तैं, नव नटवर अभिराम
मो तन देखि मधुर मुसकाने, मोहन-दृष्टि ललाम
ताही छिनते भए तिनहिं के, तन-मन-मति-धन-धाम
हौं बिनु मोल बिकी तिन चरनन्हि, रह्यौ न जग कछु काम
माधव-पद-पंकज मैं पायौ, मन मधुकर विश्राम

Kahe Aise Bhaye Kathor

निहोरा
काहे ऐसे भये कठोर
टेरत टेरत भई वयस अब, तक्यो न मेरी ओर
कहा करों, कोउ पंथ न दीखत, साधन भी नहिं और
पै तुम बिनु मेरे मनमोहन, दीखत और न ठौर
काहे अब स्वभाव निज भूले, करहुँ न करुना कोर
हूँ मैं दीन भिखारी प्यारे, तुम उदार-सिरमौर