Pritam Aaye Pritam Aaye Aaj Mere Ghar Pritam Aaye

हरि दर्शन
प्रीतम आए प्रीतम आये, आज मेरे घर प्रीतम आये
रहत रहत मैं अँगना बुहारूँ, मोतियाँ माँग भराऊँ, भराऊँ
चरण पखार देख सुख पाऊँ, सब साधन बरसाऊँ
पाँच सखी मिल मंगल गाये, राग सरस मैं गाऊँ
करूँ आरती, प्रेम निछावर, पल-पल मैं बलि जाऊँ
कहे ‘कबीर’ धन भाग हमारा, परम पुरुष वर पाऊँ

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