Prabhu Ka Sharanagat Ho Jayen

शरणागति
प्रभु के शरणागत हो जायें
अपने बल का अभिमान त्याग, उनका ही आश्रय ले पायें
प्रभु का ही अंश है जीव मात्र, अंशी की शरण से दुख न रहे
साधना ऐसा कोई न और, चिंताएँ भय सब शोक बहे
वेदों का सार उपनिषद् है, भगवद्गीता उनका भी सार
उसका भी सार शरणागति है, भव-निधि से हमको करे पार

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